नयी दिल्ली. कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर को दोपहर के भोज पर बुलाया जाना और तारीफ किया जाना भारतीय कूटनीति के लिए बड़ा झटका है. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ”फील्ड मार्शल आसिम मुनीर न तो किसी देश का राष्ट्राध्यक्ष है, न ही किसी सरकार का प्रमुख. वह पाकिस्तान का सेना प्रमुख है. इसके बावजूद उसे राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में लंच पर आमंत्रित किया और उसकी जमकर तारीफ की.” उन्होंने कहा, ”आसिम मुनीर वही व्यक्ति है, जिसके भड़काऊ और आपत्तिजनक बयानों की पृष्ठभूमि में 22 अप्रैल को पहलगाम में बर्बर आतंकी हमला हुआ और इसे उसी सैन्य तंत्र ने अंजाम दिया, जिसका प्रमुख वह स्वयं है.” रमेश ने कहा कि यह भारतीय कूटनीति (झप्पी कूटनीति के लिए भी) के लिए एक बड़ा झटका है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को व्हाइट हाउस में पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की मेजबानी की. पाकिस्तानी सेना प्रमुख आसिम मुनीर की ट्रंप से यह मुलाकात भारत और पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य संघर्ष के कुछ सप्ताह बाद हुई है. इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के दो ”बहुत समझदार” नेताओं ने एक ऐसा युद्ध जारी न रखने का ”निर्णय” लिया जो परमाणु युद्ध में बदल सकता था.
पिछले कुछ हफ्तों में यह पहली बार है जब ट्रंप ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच संघर्ष रोकने के लिए खुद श्रेय नहीं लिया है. कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को ट्रंप के मध्यस्थता संबंधी दावे का सार्वजनिक रूप से खंडन करना चाहिए. उन्होंने एक बयान में दावा किया, ”ट्रंप ने मोदी जी के प्रचार तंत्र की हवा निकाल दी है. विदेश सचिव के माध्यम से एक टेलीफोनिक वार्ता के विषय में हमें जो भी बताया गया, उन दावों को ट्रंप ने एक तरह से झुठला दिया.” खेड़ा ने सवालिया अदांज में कहा कि क्या हमारे प्रधानमंत्री की बात में अब इतना ही वजन रह गया है कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी बात समझाने में आधा घंटा लगा? उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान को एक तराजू में रखा गया, लेकिन सरकार चुप है. कांग्रेस नेता ने कहा, ”प्रधानमंत्री का अपमान विपक्ष को तो बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है.”
उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मानसून सत्र में चीन पर चर्चा के लिए सहमत होंगे : कांग्रेस
कांग्रेस ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह पिछले पांच वर्षों से संसद में चीन पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रही है और उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगामी मानसून सत्र में इस चर्चा के लिए आखिरकार सहमत होंगे. पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि चीन के कारण पैदा होने वाली राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर राष्ट्रीय सहमति की दिशा में सामूहिक रूप से काम करना जरूरी है.
रमेश ने गलवान घाटी की घटना के बाद प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए एक वक्तव्य का उल्लेख करते हुए ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “आज प्रधानमंत्री मोदी की चीन को दी गई क्लीन चिट की पांचवीं वर्षगांठ है. उन्होंने 15 जून, 2020 को गलवान में देश के लिए हमारे 20 बहादुर सैनिकों के अपने प्राणों की आहुति देने के मात्र चार दिन बाद कहा था, “न कोई हमारी सीमा में घुस आया है, न ही कोई घुसा हुआ है”. यह खेदजनक प्रकरण 21 अक्टूबर, 2024 को एक समझौते के साथ समाप्त हुआ.” उनका कहना है कि दूरसंचार, दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र चीनी आयात पर गंभीर रूप से निर्भर हैं. चीन के साथ व्यापार घाटा 2024-25 में रिकॉर्ड 99.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है.
रमेश के अनुसार, इस बीच, चीन को निर्यात आज 2013-14 की तुलना में कम है, जबकि रुपया बहुत कमज.ोर है, जिससे सिद्धांत रूप में निर्यात अधिक प्रतिस्पर्धी हो जाना चाहिए था. उन्होंने दावा किया कि चीनी आर्थिक शक्ति के आगे यह आत्मसमर्पण विदेश मंत्री एस जयशंकर के इसी तरह के बयान का परिणाम है, जब उन्होंने कहा था कि “देखिए, वे बड़ी अर्थव्यवस्था हैं. मैं क्या करने जा रहा हूँ? एक छोटी अर्थव्यवस्था के रूप में, क्या मैं बड़ी अर्थव्यवस्था से लड़ाई करने जा रहा हूँ?” कांग्रेस महासचिव ने कहा कि अब यह स्पष्ट हो रहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के सैन्य अभियानों में चीन ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.
रमेश का कहना है, “हमारी उत्तरी और पश्चिमी सीमाओं को घेरने वाली एक ही मोर्चे की चुनौती आज एक वास्तविकता प्रतीत होती है.” उन्होंने कहा, “कांग्रेस पार्टी पिछले पांच वर्षों से चीन पर विस्तृत चर्चा की मांग कर रही है. अब तक तो ऐसा नहीं हुआ. लेकिन हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री संसद के आगामी सत्र में इस चर्चा के लिए आखिरकार सहमत होंगे. ” रमेश ने इस बात पर जोर दिया कि चीन के दुनिया की प्रमुख विनिर्माण शक्ति और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरने से उत्पन्न इन महत्वपूर्ण सुरक्षा और आर्थिक चुनौतियों पर राष्ट्रीय सहमति की दिशा में सामूहिक रूप से काम करना महत्वपूर्ण है.

