नयी दिल्ली. भारतीय फिल्म निर्माताओं और वितरकों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विदेशी फिल्मों पर शत-प्रतिशत शुल्क लगाने की घोषणा के वास्तविक प्रभाव का आकलन करना अभी जल्दबाजी होगी. उन्होंने हालांकि स्वीकार किया कि अगर यह अमेरिका में रिलीज होने वाली भारतीय फिल्मों पर लागू होता है, तो टिकट की दरें बढ़ जाएंगी. ट्रंप ने सोमवार को मई में की गई अपनी टिप्पणी को दोहराते हुए घोषणा की कि वह ”अमेरिका के बाहर बनी सभी फिल्मों पर 100 प्रतिशत शुल्क” लगाएंगे.
प्रोड्यूसर्स गिल्ड ऑफ इंडिया के अध्यक्ष शिबाशीष सरकार ने ट्रंप की हालिया घोषणा के बारे में कहा कि वह इस मामले में ‘प्रतीक्षा करो और नजर रखो’ की नीति अपना रहे हैं, क्योंकि फिल्मों पर यह शुल्क कैसे लगाया जाएगा, उसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है. सरकार ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”हमें इस बारे में उनका परिपत्र जारी होने तक इंतजार करना चाहिए. ऐसा लगता है कि उनका ध्यान उन अमेरिकी फिल्मों पर है, जो निर्माण के लिए अमेरिका से बाहर जा रही हैं और जब वे प्रदर्शन के लिए अपने देश में आएंगी तो वह उन पर शुल्क बढ़ाना चाहते हैं. इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार और निवेश लाना है. ऐसे में, अमेरिका में रिलीज होने वाली किसी गैर-अमेरिकी फिल्म पर मुझे कोई बड़ा प्रभाव नहीं दिखता.” उन्होंने कहा कि यदि शुल्क अमेरिकी बाजार में रिलीज होने वाली सभी फिल्मों.. अमेरिकी और विदेशी दोनों पर लागू होता है, तो भारतीय फिल्मों पर इसका प्रभाव पड़ सकता है.
सरकार ने कहा, ”ऐसी स्थिति में, निर्माता टिकट की बढ़ी कीमतों का बोझ उपभोक्ता पर डाल देंगे और फिर दर्शकों की संख्या कम हो जाएगी. भारतीय फिल्मों के लिए यह ज्यादा मायने नहीं रखता, क्योंकि उनका व्यवसाय काफी हद तक घरेलू टिकटों की बिक्री से आता है. विदेशी बाजारों में अमेरिका बड़ा है, लेकिन हिंदी फिल्मों के कुल राजस्व में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ छह से सात प्रतिशत है.” उन्होंने कहा, ”तमिल और तेलुगु फिल्मों के लिए अमेरिका एक महत्वपूर्ण बाजार है. यदि शत-प्रतिशत शुल्क लगता है, तो दक्षिण की फिल्मों के लिए राजस्व स्तर पर पांच से छह प्रतिशत का प्रभाव पड़ेगा और हिंदी फिल्मों के लिए यह तीन से चार प्रतिशत होगा.” प्रमुख फिल्म वितरक राजेश थडानी ने भी कहा कि ट्रंप के प्रस्तावित शुल्क के बारे में ज्यादा स्पष्टता नहीं है.
उन्होंने कहा, ”अगर भारतीय फिल्मों और कंपनियों पर शत-प्रतिशत शुल्क लागू होता है, तो इसका हम पर भी कुछ असर जरूर पड़ेगा. अमेरिका भारतीय फिल्मों, खासकर ‘बाहुबली’, ‘केजीएफ’ जैसी दक्षिण भारतीय फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है. अगर शुल्क वहां दिखाई जा रही भारतीय फिल्मों पर लागू होता है, तो टिकट की दरें बढ़ सकती हैं और कम लोग सिनेमाघरों में जाएंगे. अभी यह पता नहीं चला है कि नेटफ्लिक्स और इसके जैसे अन्य स्ट्रीमिंग मंच इस शुल्क के दायरे में आते हैं या नहीं.” फिल्म प्रदर्शक-वितरक अक्षय राठी ने कहा कि उत्तरी अमेरिका भारतीय फिल्मों, विशेषकर तेलुगु फिल्मों के लिए एक महत्वपूर्ण बाजार है.
उन्होंने कहा, ”फिल्म बिरादरी उत्तरी अमेरिका में अपनी फिल्में रिलीज करना जारी रख सकती है. वहां के सिनेमाघरों के हित में यह है कि वे टिकटों की कीमत समझदारी से तय करें, जहां 100 प्रतिशत शुल्क उचित है, ताकि पर्याप्त संख्या में लोग सिनेमाघरों में आएं. मुझे यकीन है कि वे कोई न कोई समाधान जरूर निकाल लेंगे, ताकि शुल्क के कारण फिल्मों के दर्शकों की संख्या में कोई कमी न आए.” राठी ने कहा, ”हालांकि, नीति का अंतिम खाका सामने आने तक इंतजार करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे अधिक स्पष्टता आएगी.” टिप्स फिल्म्स के रमेश तौरानी ने ट्रंप के कई बयानों में अनिश्चितता और स्पष्टता की कमी को रेखांकित किया. उन्होंने कहा, ”इस पर अभी टिप्पणी करना जल्दबाजी होगी, क्योंकि वह रोज कुछ नया कहते रहते हैं. हमें इंतजार करना चाहिए और देखना चाहिए कि क्या चीजें सुलझती हैं.” ‘डिटेक्टिव शेरदिल’, ‘जोगी’ और ‘ब्लडी डैडी’ जैसी फिल्मों और ‘तांडव’ जैसी ओटीटी सीरीज के लिए मशहूर निर्माता हिमांशु मेहरा ने सवाल उठाया कि प्रस्तावित शुल्क फिल्मों को कैसे प्रभावित करेगा.
मेहरा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ”अगर शुल्क का बोझ उपभोक्ता, टिकट खरीदने वालों पर पड़ता है तो हमें लगता है कि असर पड़ेगा क्योंकि वे बड़े उपभोक्ता हैं.” ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने पोस्ट में कहा कि ”कुछ देशों ने अमेरिका से फिल्म निर्माण कारोबार चुरा लिया है. यह उसी तरह है जिस तरह किसी बच्चे से कैंडी छीन ली जाती है.”

