लखनऊ/नयी दिल्ली. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस), राज्य सरकार के अधिकारियों और कुछ बैंकों को अवैध धर्मांतरण गिरोह के कथित सरगना जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा की संपत्तियों, खातों और वित्तीय स्थिति का पता लगाने के लिए पत्र लिखा. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी.
संघीय जांच एजेंसी जल्द ही अदालत में याचिका दायर कर बलरामपुर जिले के रहने वाले उस व्यक्ति से पूछताछ के लिए हिरासत में रिमांड का अनुरोध करेगी, जिसका असली नाम करीमुल्ला शाह है. जलालुद्दीन, उसके बेटे महबूब और साथियों नवीन उर्फ जमालुद्दीन और नीतू उर्फ नसरीन को एटीएस ने गिरफ्तार कर लिया है. वे फिलहाल जेल में बंद हैं.
ईडी की लखनऊ जोनल इकाई ने बुधवार को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत एक आपराधिक मामला दर्ज किया था, जिसमें लखनऊ के गोमती नगर पुलिस थाने में जलालुद्दीन उर्फ ??छांगुर बाबा और कुछ अन्य के खिलाफ एटीएस की प्राथमिकी का संज्ञान लिया गया.
एजेंसी सूत्रों ने बताया कि ईडी को प्रारंभिक जानकारी मिली है, जिससे पता चलता है कि इस व्यक्ति ने अपने और अपने सहयोगियों से जुड़े 40 बैंक खातों में लगभग 106 करोड़ रुपये जमा किए हैं, जिनमें से ज्यादातर पश्चिम एशिया से हैं. सूत्रों ने आरोप लगाया कि जलालुद्दीन ने एक ”व्यापक नेटवर्क” बनाया था जो बलरामपुर में ”चांद औलिया दरगाह” के परिसर से संचालित हो रहा था, जहां वह नियमित रूप से ”बड़ी” सभाएं आयोजित करता था, जिनमें भारतीय और विदेशी दोनों नागरिक शामिल होते थे.
सूत्रों ने दावा किया कि इस व्यक्ति ने अपने धार्मिक प्रवचनों, ”शिजरा-ए-तैय्यबा” नामक पुस्तक के प्रकाशन के माध्यम से इस्लाम को “बढ़ावा” दिया, जबकि अन्य धर्मों के लोगों – विशेष रूप से हिंदुओं, अनुसूचित जातियों और आर्थिक रूप से वंचित व्यक्तियों – को ”व्यवस्थित रूप से” धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित और मजबूर किया.
सूत्रों ने बताया कि ”अपराध से सृजित आय” का पता लगाने के लिए ईडी ने एटीएस, बलरामपुर जिला अधिकारियों और कुछ बैंकों के धन शोधन निरोधक प्रकोष्ठों को पत्र लिखकर जलालुद्दीन, उसके परिवार और उससे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों, खातों और वित्त के बारे में जानकारी मांगी है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा था कि ”प्रारंभिक जांच” से पता चला है कि आरोपी जलालुद्दीन की गतिविधियां ”न केवल समाज के, बल्कि राष्ट्र के भी विरुद्ध” हैं.
एटीएस ने अवैध वित्तपोषण, धर्मांतरण नेटवर्क का पता लगाने को जलालुद्दीन, नसरीन को लिया रिमांड पर
उत्तर प्रदेश आतंकवाद रोधी दस्ता (उप्र एटीएस) ने धर्मांतरण गिरोह और अवैध वित्तपोषण के स्रोतों का पता लगाने के लिए जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन की हिरासत ले ली है. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी. एटीएस अवैध वित्तपोषण से खरीदी गई बेनामी संपत्तियों का भी पता लगाएगी.
अपर पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था) अमिताभ यश ने यहां पुलिस मुख्यालय में संवाददाताओं को बताया कि एटीएस द्वारा पूर्व में दर्ज मामले में पांच जुलाई को जलालुद्दीन और नसरीन को गिरफ्तार किया गया था. एक विशेष अदालत ने बुधवार को जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन को एक सप्ताह की एटीएस हिरासत में भेजने का आदेश दिया. यश ने कहा कि एटीएस अब इनके नेटवर्क, अवैध वित्तपोषण के स्रोतों और अवैध साधनों से खरीदी गई संपत्तियों के बारे में आरोपियों से पूछताछ करेगी.
उन्होंने कहा, “इस गिरोह के धन के स्रोतों, विभिन्न क्षेत्रों में फैले इसके नेटवर्क के साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि अवैध रूप से हासिल की गई इन संपत्तियों का कैसे उपयोग किया गया और कैसे इन संपत्तियों को जायज बनाया गया. गैंगस्टर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और ऐसी संपत्तियों को ध्वस्त किया जाएगा.” यह पूछे जाने पर कि इस गिरोह के जरिए कितने लोगों का धर्म परिवर्तन कराया गया, यश ने कहा कि चूंकि यह गिरोह कथित तौर पर 15 वर्षों से अधिक समय से सक्रिय है, इसलिए व्यापक स्तर पर धर्म परिवर्तन कराए जाने की संभावना है. हालांकि उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने तक सटीक संख्या बताना जल्दबाजी होगी.
इस मामले में नौ लोगों के नाम सामने आए हैं तो केवल चार लोगों की गिरफ्तारी क्यों की गई, इस सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर ही गिरफ्तारी की जाती है.
उन्होंने कहा कि एटीएस पहले ही उन लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है जिनके खिलाफ ठोस साक्ष्य उपलब्ध थे. माफिया एवं पूर्व विधायक मुख्तार अंसारी से जलालुद्दीन का संबंध होने की रिपोर्ट पर यश ने कहा कि ऐसे सभी संपर्कों की जांच की जा रही है और जांच में पुष्टि होने के बाद ही कोई औपचारिक बयान जारी किया जाएगा. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के इस मामले में शामिल होने को लेकर उन्होंने पुष्टि की कि इस केंद्रीय एजेंसी ने एटीएस से प्राथमिकी की प्रति देने का अनुरोध किया है.
उन्होंने कहा, “हालांकि इस चरण में पुलिस मुख्यालय से हमें धन शोधन की जांच के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है.” जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा को उसकी सहयोगी नीतू उर्फ नसरीन के साथ पांच जुलाई को बलरामपुर में माधपुर गांव से गिरफ्तार किया गया था. दोनों पर ही वित्तीय प्रोत्साहन, शादी के प्रस्ताव और भावनात्मक रूप से दबाव बनाकर कमजोर तबके के लोगों को इस्लाम कबूल कराने का आरोप है. जलालुद्दीन पर 50,000 रुपये का इनाम घोषित था और उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी किया गया था.
दो अन्य आरोपियों- नवीन उर्फ जमालुद्दीन और महबूब (जलालुद्दीन के बेटे) को अप्रैल में गिरफ्तार किया गया था और वर्तमान में ये लखनऊ की जेल में बंद हैं.

