नयी दिल्ली. उपराष्ट्रपति पद से अचानक इस्तीफा देकर सभी को आश्चर्यचकित करने वाले जगदीप धनखड़ ने अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया है और जल्द ही वह उपराष्ट्रपति एन्क्लेव खाली करेंगे. सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी. पूर्व उपराष्ट्रपति होने के नाते वह सरकारी बंगले के हकदार हैं.
सूत्रों ने बताया कि धनखड़ दंपति ने मंगलवार को अपना सामान पैक करना शुरू कर दिया. उन्होंने कहा कि जल्द ही वह अपने सरकारी आवास को खाली करेंगे. धनखड़ (74) पिछले साल अप्रैल में संसद भवन परिसर के निकट चर्च रोड पर नवनिर्मित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में स्थानांतरित हो गए थे. उपराष्ट्रपति एन्क्लेव का निर्माण सेंट्रल विस्टा पुर्निवकास योजना के तहत किया गया था. वह लगभग 15 महीने तक उपराष्ट्रपति एन्क्लेव में रहे.
शहरी विकास मंत्रालय के एक अधिकारी ने मंगलवार को कहा, ”उन्हें (धनखड़ को) लुटियंस दिल्ली या किसी अन्य क्षेत्र में टाइप-8 बंगला देने की पेशकश की जाएगी.” टाइप-8 बंगला आमतौर पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों या राष्ट्रीय दलों के अध्यक्षों को आवंटित किया जाता है. धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए सोमवार को उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था.
इस्तीफे की घोषणा से पहले ”अचानक” राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे धनखड़
पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ इस्तीफा देने से पहले सोमवार को ”अचानक” राष्ट्रपति भवन पहुंचे थे. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. धनखड़ ने सोमवार रात करीब नौ बजे राष्ट्रपति मुर्मू से मुलाकात की और उन्हें अपना इस्तीफा सौंपा. सूत्रों ने बताया कि आधे घंटे बाद उन्होंने अपना त्यागपत्र सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सार्वजनिक कर दिया.
धनखड़ ने अपने पत्र में कहा, ”स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और चिकित्सकीय सलाह का पालन करने के लिए मैं संविधान के अनुच्छेद 67(ए) के अनुसार तत्काल प्रभाव से भारत के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देता हूं.” धनखड़ (74) ने अगस्त 2022 में पदभार ग्रहण किया था और उनका कार्यकाल अगस्त 2027 में समाप्त होना था. धनखड़ राज्यसभा के पदेन सभापति भी थे. उन्होंने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन अपना इस्तीफा दे दिया.
उपराष्ट्रपति चुनाव : कुल 16 चुनावों में चार बार उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हुए
भारत के उपराष्ट्रपति पद के लिए अब तक 16 चुनाव हुए हैं और केवल चार बार ही उम्मीदवार निर्विरोध जीत सके जबकि दो चुनावों में बहुकोणीय मुकाबला देखने को मिला. सर्वपल्ली राधाकृष्णन 1952 से 1962 तक दो बार उपराष्ट्रपति रहे और वह दोनों बार चुनावों में निर्विरोध विजयी रहे. 1952 के चुनाव में, आंध्र प्रदेश के जनाब शेख खादिर हुसैन ने नामांकन दाखिल किया था लेकिन उनका नामांकन पत्र खारिज कर दिया गया, जिससे राधाकृष्णन एकमात्र उम्मीदवार रह गए.
वर्ष 1979 में प्रसिद्ध न्यायविद और भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश मोहम्मद हिदायतुल्लाह निर्विरोध उपराष्ट्रपति चुने गए. हिदायतुल्लाह को प्रधान न्यायाधीश, उपराष्ट्रपति और कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करने का अनूठा गौरव प्राप्त है.
प्रधान न्यायाधीश के रूप में, हिदायतुल्लाह ने 1969 में एक महीने तक कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में काम किया, जब वी.वी. गिरि ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए कार्यवाहक राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया था.
तीन मई, 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद, गिरि ने कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभाला. 1987 में महाराष्ट्र के तत्कालीन राज्यपाल शंकर दयाल शर्मा ने उपराष्ट्रपति का चुनाव निर्विरोध जीता. नौवें उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 27 लोगों ने नामांकन पत्र दाखिल किए थे लेकिन निर्वाचन अधिकारी ने केवल शर्मा के आवेदन को ही वैध पाया.
उसके बाद 1992 में अगले उपराष्ट्रपति चुनाव में के.आर. नारायणन को 701 मतों में से 700 मत मिले. उनके प्रतिद्वंद्वी काका जोगिंदर सिंह को, जिन्हें ‘धरती पकड़’ के नाम से भी जाना जाता था, को केवल एक वोट मिला. चुनाव में कुल 711 मत पड़े जिनमें से 10 अवैध पाए गए. उपराष्ट्रपति चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला सिर्फ 2007 में देखा गया जब संप्रग उम्मीदवार एम. हामिद अंसारी का मुकाबला राजग प्रत्याशी नजमा हेपतुल्लाह और तीसरे मोर्चे के उम्मीदवार रशीद मसूद से था.
उस चुनाव में कुल 790 मतदाताओं में से 762 ने अपने मत डाले, जिनमें से 10 अवैध पाए गए. वैध 752 मतों में से अंसारी को 455, हेपतुल्ला को 222 और मसूद को 75 मत मिले. वर्ष 1962 में, जाकिर हुसैन ने एन सी सामंतसिंह के विरुद्ध 554 मतों से उपराष्ट्रपति का चुनाव जीता. 745 सदस्यीय निर्वाचक मंडल में से 596 सदस्यों ने अपने मत डाले, जिनमें से 14 अवैध पाए गए.
वर्ष 1967 में, वी वी गिरि ने प्रोफेसर हबीब को पराजित कर उपराष्ट्रपति चुनाव जीता. 1969 में जी एस पाठक पांच उम्मीदवारों को हराकर उपराष्ट्रपति बने. उस वर्ष राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए गिरि के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के कारण चुनाव कराया गया. 1974 में बी. डी. जट्टी ने एन. ई. होरो को हराकर उपराष्ट्रपति चुनाव जीता. जट्टी को 521 जबकि होरो को 141 वोट मिले.
वर्ष 1984 में, आर. वेंकटरमन ने उपराष्ट्रपति चुनाव जीता. उन्हें 715 वैध मतों में से 508 मत मिले. उन्होंने बापू चंद्रसेन कांबले को हराया. 1987 में वेंकटरमन ने राष्ट्रपति चुनाव लड़ने के लिए पद छोड़ दिया और उस वर्ष हुए चुनाव में शंकर दयाल शर्मा उपराष्ट्रपति चुने गए. 1997 में कृष्णकांत ने उपराष्ट्रपति चुनाव में सुरजीत सिंह को हराया. कांत को 441 जबकि सिंह को 273 वोट मिले.
भाजपा नेता भैरों सिंह शेखावत ने 2002 के उपराष्ट्रपति चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार सुशील कुमार शिंदे को हराया. शेखावत को 759 वैध मतों में से 454 वोट मिले जबकि शिंदे को 305 वोट मिले. 2007 में एम हामिद अंसारी ने उपराष्ट्रपति चुनाव जीता और 2012 में तत्कालीन संप्रग सरकार ने उन्हें फिर से उम्मीदवार मैदान में उतारा.
वर्ष 2012 में अंसारी ने भाजपा उम्मीदवार जसवंत सिंह को 490 वोटों से हराया. 2017 में भाजपा नेता एम वेंकैया नायडू ने कांग्रेस नीत संप्रग के गोपालकृष्ण गांधी को हराया. नायडू को 760 वैध मतों में से 516 वोट जबकि गांधी को 244 वोट मिले. वर्ष 2022 में, भाजपा नीत राजग के उम्मीदवार जगदीप धनखड़ ने कांग्रेस नीत संप्रग उम्मीदवार मार्गरेट अल्वा को हराया. धनखड़ को 528 वोट जबकि अल्वा को 182 वोट मिले.

