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Home»Chhattisgarh»वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक संकट से MSME उद्योगों पर असर
Chhattisgarh

वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक संकट से MSME उद्योगों पर असर

Team RashtrawaniBy Team RashtrawaniMarch 15, 2026No Comments3 Mins Read
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वैश्विक युद्ध और भू-राजनीतिक संकट से MSME उद्योगों पर असर
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🔴एंसीलरी अध्यक्ष ने राहत के लिए केंद्र सरकार को लिखा पत्र

भिलाईनगर, 15 मार्च 2026। अंतरराष्ट्रीय युद्धों और वैश्विक भू-राजनीतिक संघर्षों के चलते सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) के सामने गंभीर चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। इस स्थिति को देखते हुए BSP Ancillary Industries Association के अध्यक्ष Ratan Dasgupta ने Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises, भारत सरकार के सचिव को पत्र लिखकर एमएसएमई उद्योगों की समस्याओं से अवगत कराया है और विशेष राहत उपायों की मांग की है।
रतन दासगुप्ता ने अपने पत्र में कहा कि सूक्ष्म विनिर्माण उद्यम देश में जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन के सबसे बड़े स्रोतों में से एक हैं। ये बड़ी संख्या में कुशल और अर्द्ध-कुशल श्रमिकों को रोजगार देते हैं। ऐसे में इनके संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा औद्योगिक उत्पादन के साथ-साथ रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डालती है।
उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय युद्धों और भू-राजनीतिक अस्थिरताओं के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है। इसके चलते औद्योगिक गैसों, मिश्र धातु तत्वों, इलेक्ट्रोड्स और अन्य जरूरी कच्चे माल की उपलब्धता पर गंभीर असर पड़ा है। परिणामस्वरूप आपूर्ति में अनियमितता, कीमतों में तेज वृद्धि, खरीद में देरी और परिवहन संबंधी कठिनाइयां सामने आ रही हैं।
दासगुप्ता ने केंद्र सरकार से अनुरोध किया है कि मौजूदा परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सरकारी विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों और प्रमुख औद्योगिक खरीदारों को दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि सूक्ष्म विनिर्माण इकाइयों को विशेष सहायता मिल सके।
राहत उपायों की मांग
अपने पत्र में उन्होंने कई राहत उपायों का भी सुझाव दिया है। इनमें एमएसएमई आपूर्ति आदेशों के लिए कम से कम पांच माह की अतिरिक्त आपूर्ति अवधि देने और इस अवधि के लिए किसी प्रकार का लेट डिलीवरी (एलडी) या दंड नहीं लगाने की मांग शामिल है।
इसके अलावा वैश्विक आपूर्ति व्यवधान के दौरान लगाए गए एलडी शुल्क को माफ करने या वापस करने, कच्चे माल और आयातित तत्वों की कीमतों में असामान्य वृद्धि को देखते हुए मौजूदा अनुबंधों में मूल्य संशोधन की अनुमति देने की मांग भी की गई है।
दासगुप्ता ने कहा कि बिक्री और उत्पादन प्रभावित होने के कारण एमएसएमई इकाइयों को कम से कम 6 से 9 महीनों के लिए बैंक ब्याज में राहत दी जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म विनिर्माण उद्यम भले ही आकार में छोटे हों, लेकिन औद्योगिक मूल्य श्रृंखला की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और बड़े उद्योगों को सहारा देते हुए देशभर में रोजगार सृजन करते हैं।
उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार इस कठिन समय में एमएसएमई क्षेत्र को राहत देकर औद्योगिक गतिविधियों और अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाएगी।

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