कोल्हापुर. महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रविवार को हजारों लोगों ने एक ‘मौन मार्च’ में भाग लिया, जिसमें मांग की गई कि 36 वर्षीय हथिनी ‘महादेवी’ (जिसे माधुरी भी कहा जाता है) को गुजरात के जामनगर जिले के वंतारा वन्यजीव बचाव, उपचार एवं पुनर्वास केंद्र से वापस लाया जाए.
यह मार्च सुबह नंदनी से शुरू हुआ और जिला कलेक्ट्रेट के बाहर समाप्त हुआ जिसका नेतृत्व पूर्व सांसद राजू शेट्टी ने किया. जिला कलेक्ट्रेट में हाथी की वापसी के लिए अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया. शेट्टी ने मार्च में शामिल लोगों को संबोधित करते हुए कहा, “जब माधुरी को ले जाया जा रहा था तो वह रो रही थी. जिस स्थान पर उसे स्थानांतरित किया गया है, वहां 225 हाथी हैं, लेकिन फिर भी वे उसे चाहते थे, क्योंकि वह बहुत सुंदर है.” राज्य के स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश अबितकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि शुक्रवार को कोल्हापुर में हुई बैठक में वंतारा के अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि वे महादेवी को कोल्हापुर जिले के नंदनी में वापस लाने के प्रयासों में सहयोग करेंगे.
‘महादेवी’ तीन दशकों से अधिक समय तक नंदनी में श्री जिनसेन भट्टारक पट्टाचार्य महास्वामी जैन मठ में थी. उसे इस सप्ताह की शुरुआत में अदालत के फैसले के बाद वंतारा के राधे कृष्ण मंदिर हाथी कल्याण ट्रस्ट में स्थानांतरित कर दिया गया. बंबई उच्च न्यायालय ने 16 जुलाई को महादेवी को जामनगर में वंतारा के सुविधा केंद्र में पुनर्वासित करने का आदेश दिया था. यह आदेश एक गैर सरकारी संगठन द्वारा महाराष्ट्र वन विभाग और उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त उच्चाधिकार प्राप्त समिति (एचपीसी) के समक्ष उसके बिगड़ते स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक पीड़ा पर चिंता जताए जाने के बाद दिया गया था. उच्चतम न्यायालय ने 25 जुलाई को उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा.
अबितकर ने कहा कि कोल्हापुर जिले से भारतीय जनता पार्टी के सांसद धनंजय महादिक और शिवसेना सांसद धैर्यशील माने महादेवी को वापस लाने के लिए केंद्र से उच्चतम न्यायालय में हलफनामा दाखिल करवाने के लिए काम कर रहे हैं. महादिक ने बृहस्पतिवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव से मुलाकात की और महादेवी को नंदनी स्थित जैन मठ में वापस लाने के लिए एक ज्ञापन सौंपा.
वंतारा ने ‘इंस्टाग्राम’ पर एक पोस्ट में कहा, वंतारा में माधुरी का सफर ठीक तरह से देखभाल और ध्यान देने से शुरू होता है. “हम उसे समझने के लिए समय ले रहे हैं: क्या उन्हें शांत रखता है, क्या उन्हें सहज बनाता है और उसे क्या पसंद है.” वंतारा ने कहा, “यह सिर्फ इलाज की बात नहीं है; यह उसे सहज महसूस कराने, उसे अपनी शर्तों पर जीने में मदद करने के बारे में है. कदम दर कदम, उसकी गति से, उस देखभाल और सम्मान के साथ जिसकी वह सचमुच हकदार है”.
महादेवी को कथित तौर पर 1992 में कर्नाटक से कोल्हापुर मठ में लाया गया था और तब वह लगभग तीन साल की थी. उसने कथित तौर पर 2017 में मुख्य पुजारी को बार-बार दीवार पर पटक कर मार डाला था. महादेवी को पैरों में सड़न, पैर के नाखून बड़े होना, गठिया और लगातार सिर हिलाना जैसी समस्या है, जो लंबे समय तक एकांत कारावास के कारण मनोवैज्ञानिक आघात का संकेत है. कांग्रेस विधान पार्षद सतेज पाटिल ने कहा कि कोल्हापुर के लोग हथिनी को वापस चाहते हैं.
उन्होंने बताया कि महादेवी को नंदनी स्थित जैन मठ में वापस भेजने की मांग वाले फॉर्म पर दो लाख से अधिक लोगों ने हस्ताक्षर किए हैं. उन्होंने बताया कि ये फॉर्म कोल्हापुर से स्पीड पोस्ट के जरिए राष्ट्रपति कार्यालय भेजे जाएंगे. शनिवार को एक बयान में, वंतारा ने कहा कि वह “परम पूजनीय हथिनि से जुड़ी भावनाओं और आध्यात्मिक भावनाओं के प्रति गहरा सम्मान” रखता है, जिसे हाल ही में जैन मठ से स्थानांतरित किया गया है.
वंतारा ने कहा, “हम मानते हैं कि उनकी उपस्थिति प्रतीकात्मक से कहीं अधिक थी, यह कई लोगों के लिए पवित्र थी. हम स्पष्ट और सम्मानपूर्वक कहना चाहते हैं कि वंतारा ने पूरी तरह से बंबई उच्च न्यायालय के बाध्यकारी आदेशों का पालन करते हुए काम किया, जिसे बाद में उच्चतम न्यायालय ने भी बरकरार रखा.” इसने कहा,”हम इस कदम को उठाने वाले नहीं थे, लेकिन सुविधा ने अदालत के फैसले को लागू करने और उसकी देखभाल प्रदान करने का निर्देश दिया था.
बयान में कहा गया है कि वंतारा का एकमात्र उद्देश्य माधुरी के स्वास्थ्य और दीर्घकालिक कल्याण के सर्वोत्तम हित में कार्य करना है.
इसमें कहा गया है, “हम जनता की तीव्र भावनात्मक प्रतिक्रिया को पूरी तरह समझते हैं और उसके प्रति सहानुभूति रखते हैं. इसीलिए, करुणा और एकता की भावना से हमने जैन मठ और पूज्य स्वामीजी के साथ सीधा संवाद शुरू किया है.” इसके अनुसार, ”हम कानूनी और पशु चिकित्सा संबंधी मार्गदर्शन के माध्यम से माधुरी के भविष्य के लिए सभी संभावनाओं की तलाश कर रहे हैं, जिसमें एक ऐसा शांतिपूर्ण समाधान भी शामिल है जो उसकी भलाई और समुदाय की भावनाओं, दोनों को प्राथमिकता देता हो.”
बयान में कहा गया है, “वंतारा किसी भी धर्म, क्षेत्र या परंपरा के विरोध में नहीं, बल्कि उन बेजुबानों की सेवा में है जो मानवीय दया पर निर्भर हैं. हम पारर्दिशता, वैधता और सबसे बढ़कर करुणा के लिए प्रतिबद्ध हैं.” वंतारा की वेबसाइट पर इस सुविधा के विवरण के अनुसार, वंतारा को वंतारा रिलायंस द्वारा अपने बड़े पैमाने पर संरक्षण प्रयासों के तहत विकसित किया गया है. लगभग 3,000 एकड़ में फैला वंतारा क्षेत्र बचाए गए जानवरों की देखभाल और पुनर्वास के लिए एक सुरक्षित और प्राकृतिक वातावरण प्रदान करता है.

