राष्ट्रवाणी: टाटा संस के जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन और गवर्नेंस की …और पढ़ें वेणु श्रीनिवासन ने टाटा ट्रस्ट्स के प्रशासन की जांच मांगी टाटा संस के व्यावसायिक मामलों में ट्रस्टों की भागीदारी पर चिंता नोएल टाटा की नियुक्ति और टैक्स-फ्री स्टेटस पर सवाल उठाए बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली।
टाटा संस का तूफान थमने का नाम नहीं ले रहा। मामले में एक नया मोड़ आ गया है। दरअसल सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) और सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी और टाटा संस बोर्ड में उनके जॉइंट नॉमिनी डायरेक्टर वेणु श्रीनिवासन ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से ट्रस्ट के एडमिनिस्ट्रेशन और गवर्नेंस की तुरंत जांच करने को कहा है।उन्होंने गंभीर गवर्नेंस खामियों का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि है और टाटा संस के कमर्शियल मामलों में चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी पर चिंता जताई।
इतना ही नहीं श्रीनिवासन ने नोएल टाटा की परपेचुअल ट्रस्टी के तौर पर नियुक्ति और बने रहने, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन के तौर पर उनके पद के आधार, बेटे नेविल की नियुक्ति और निर्णय लेने की प्रक्रिया से खुद को अलग रखे जाने के अलावा, टाटा संस के स्ट्रैटेजिक और कमर्शियल मामलों में SDTT और उसके ट्रस्टियों की भागीदारी पर भी सवाल उठाए हैं।
नोएल टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन हैं। यह घटना चैरिटेबल ट्रस्ट्स के बीच गवर्नेंस और टाटा संस के बड़े शेयरहोल्डर के तौर पर श्रीनिवासन की भूमिका को लेकर बढ़ते तनाव को दिखाती है। टाटा ट्रस्ट्स के पास ग्रुप की होल्डिंग कंपनी, टाटा संस की 66% हिस्सेदारी है।
इसमें से, SDTT के पास टाटा संस में 27.98% और सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के पास 23.56% हिस्सेदारी है, जो कुल मिलाकर 51.54% होती है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीनिवासन द्वारा उठाई गई एक मुख्य चिंता टाटा संस के बिजनेस फैसलों में टाटा ट्रस्ट्स की बढ़ती भागीदारी है। ट्रस्ट्स के 17 सितंबर के बयान का हवाला देते हुए, जिसमें टाटा संस को लिस्ट करने के ऑप्शंस पर विचार करने और शापूरजी पलोनजी ग्रुप को लिक्विडिटी उपलब्ध कराने के नोएल टाटा के प्रस्ताव का जिक्र था, उन्होंने कहा कि ट्रस्ट्स ने “टाटा संस से जुड़े बड़े कमर्शियल ट्रांजैक्शन की पहचान करने, बातचीत करने और उन्हें लागू करने में सीधी भूमिका अपना ली है।”श्रीनिवासन ने कहा कि ऐसी भागीदारी SDTT के चैरिटेबल मकसद के अनुरूप नहीं है और इससे इसके टैक्स-फ्री स्टेटस और चैरिटेबल कॉर्पस को खतरा हो सकता है।
टाटा संस के दो मेन शेयरहोल्डर्स में से एक, SRTT को महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने मई में बैठकों में शामिल होने या फैसले लेने से रोक दिया था। यह रोक ‘लाइफ ट्रस्टी’ (जीवन भर के लिए ट्रस्टी) से जुड़े गवर्नेंस नियमों के उल्लंघन के आरोपों के बाद लगाई गई थी।रिपोर्ट्स के अनुसार श्रीनिवासन ने चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में कहा, “यह मुझे अपनी स्वतंत्र राय और वोट का इस्तेमाल करने से रोकने और एक ट्रस्टी के तौर पर मेरी स्थिति को बेअसर करने की एक असाधारण कोशिश थी, क्योंकि मेरी राय कुछ अन्य ट्रस्टियों से अलग थी।” इस बीच टाटा ट्रस्ट्स ने सोमवार को टाटा संस की रिस्ट्रक्चरिंग की एक योजना का खुलासा किया था, जिससे उसका रेगुलेटरी स्टेटस बदल जाएगा और वह एक अनलिस्टेड प्राइवेट कंपनी के तौर पर बनी रहेगी।
इसमें दो ऑपरेटिंग कंपनियों को होल्डिंग कंपनी के साथ मिलाना शामिल है।यह प्रस्ताव टाटा संस बोर्ड और आरबीआई को भेजा गया था। इस प्रस्तावित कदम से टाटा संस एक होल्डिंग और ऑपरेटिंग, दोनों तरह की कंपनी बन जाएगी।
