राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, रायपुर। टीवी के चर्चित धारावाहिक ‘भाभी जी घर पर हैं’ में मनमोहन तिवारी का लोकप्रिय किरदार निभाने वाले अभिनेता रोहिताश्व गौड़ ने जेन-जी के प्रदर्शन पर कहा कि युवाओं का अपनी मांगों और अधिकारों के लिए आवाज उठाना पूरी तरह सही है, लेकिन प्रदर्शन के दौरान अभद्र भाषा का इस्तेमाल करना और भाषा की मर्यादा भूल जाना कतई उचित नहीं है। वे रविवार को राजधानी रायपुर में थे। रोहिताश्व ने कहा कि ‘भाभी जी घर पर हैं’ की कहानी किसी बड़े शहर की चमक-दमक से नहीं, बल्कि गली-मोहल्ले के आम जीवन और रोजमर्रा की परिस्थितियों से जुड़ी है। यही वजह है कि दर्शक इसके किरदारों में खुद को तलाश लेते हैं। उनका मानना है कि सरल, सहज और पारिवारिक हास्य ने धारावाहिक को लंबे समय तक दर्शकों से जोड़े रखा है। धारावाहिक के 11 साल लंबे सफल सफर पर चर्चा करते हुए अभिनेता ने बताया कि इस शो की सबसे बड़ी ताकत इसकी चमक-दमक से दूर, गली-मोहल्ले के आम जीवन और रोजमर्रा की परिस्थितियों से जुड़ी इसकी सरल, सहज और पारिवारिक कॉमेडी है। यही कारण है कि दर्शक इसके किरदारों में खुद को आसानी से तलाश लेते हैं। धारावाहिक में अनीता भाभी और अंगूरी भाभी के किरदार निभाने वाली अभिनेत्रियों में समय-समय पर हुए बदलाव को लेकर उन्होंने माना कि जब लंबे समय तक कोई कलाकार किसी भूमिका में रहता है, तो दर्शकों का उससे एक भावनात्मक रिश्ता बन जाता है, और बदलाव से यह जुड़ाव कुछ हद तक प्रभावित जरूर होता है। बावजूद इसके, शो की मूल विषय-वस्तु आज भी दर्शकों को जोड़े हुए है। आज के दौर में मनोरंजन का लोकप्रिय माध्यम बन चुकी वेब सीरीज पर चिंता जताते हुए रोहिताश्व गौड़ ने कहा कि इसने दर्शकों को नए विषय और विकल्प जरूर दिए हैं, लेकिन इसमें आपत्तिजनक और अभद्र भाषा का बढ़ता इस्तेमाल चिंता का विषय है। उनका मानना है कि मनोरंजन के नाम पर भाषा की लक्ष्मण रेखा पूरी तरह खत्म नहीं होनी चाहिए, इसलिए उन्होंने वेब सीरीज में आवश्यक नियंत्रण और सेंसरशिप का पुरजोर समर्थन किया। अपने सफर को याद करते हुए उन्होंने धारावाहिक की टीम और सह-कलाकारों के साथ अपने गहरे रिश्तों का जिक्र किया। उन्होंने विभूति नारायण का किरदार निभाने वाले अभिनेता आसिफ शेख को अपना करीबी मित्र बताया और कहा कि इस धारावाहिक ने उन्हें देश भर के दर्शकों का बेशुमार प्यार तो दिया ही है, साथ ही ऐसे अनमोल रिश्ते भी दिए हैं जिन्हें वे अपने निजी जीवन की बहुत बड़ी उपलब्धि मानते हैं। जेन-जी के प्रदर्शनों पर पूछे गए सवाल के जवाब में रोहिताश्व ने कहा कि युवा अपनी मांगों और अधिकारों के लिए आवाज उठा सकते हैं। यह उनका अधिकार है। लेकिन अपनी बात रखने के दौरान भाषा की मर्यादा और सामाजिक संस्कारों का ध्यान रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पिछली पीढ़ियों में भाषा और सामाजिक मर्यादा को लेकर अधिक सजगता दिखाई देती थी।
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