राष्ट्रवाणी: विशेषज्ञों का कहना है कि अक्षांश बैंड में आने का मतलब यह नहीं कि ये शहर सीधे मलबे के रास्ते में हैं.वास्तविक लैंडिंग स्थान टेलीस्कोप की स्थिति पर निर्भर करेगा. कई खगोलविद मानते हैं कि ज्यादातर अवशेष समुद्र में गिरने की संभावना ज्यादा है क्योंकि पृथ्वी का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा पानी से ढका हुआ है. ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के खगोलविद ब्रैड टकर के अनुसार 10 में से सिर्फ तीन बार ही मलबा जमीन पर गिरने की संभावना रहती है. डर्हम यूनिवर्सिटी के जोनाथन मैकडॉवेल ने कहा कि उन्हें हैरानी होगी अगर 1500 किलोग्राम वाले टेलीस्कोप का 100 किलोग्राम हिस्सा भी बचकर धरती तक पहुंचे. हालांकि अभी तक वैज्ञानिकों की ओर से नुकसान या किसी व्यक्ति के घायल होने की संभावना बेहद कम बताई जा रही है. इस बीच भारत में इसरो का मल्टी-ऑब्जेक्ट ट्रैकिंग रडार (एमओटीआर) श्रीहरिकोटा में ऐसी वस्तुओं पर नजर रखता है, लेकिन इस टेलीस्कोप को ट्रैक करने की कोई आधिकारिक जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है.22 साल के अपने सफर में स्विफ्ट ने 2,000 से ज्यादा गामा-रे बर्स्ट और 1,400 सुपरनोवा का अध्ययन किया. नासा के प्रयासों के बावजूद इसे बचाना संभव नहीं हो सका और अब यह अपना अंतिम सफर तय कर रहा है. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें
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