राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर: हाई कोर्ट में नौकरी लगवाने के नाम पर 16 लाख रुपये की धोखाधड़ी के आरोपित आरक्षक डोमन कुमार पाटिल (35) की जमानत याचिका अपर सत्र न्यायाधीश/प्रथम फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय, बिलासपुर की न्यायाधीश पूजा जायसवाल ने खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि आरोप गंभीर प्रकृति का है।

आरोपपत्र पेश हो चुका है, लेकिन अभी किसी भी साक्षी का बयान दर्ज नहीं हुआ है। ऐसे में जमानत देने पर साक्षियों को प्रभावित किए जाने की आशंका से इन्कार नहीं किया जा सकता। सकरी थाने में अपराध दर्ज मामले में आरोपित डोमन कुमार पाटिल सकरी बटालियन में आरक्षक था।

बाद में मनीष कौशिक और विकास कुमार कौशिक ने भी बताया कि उनसे नौकरी लगाने के नाम पर पांच-पांच लाख रुपये लिए गए थे। इस तरह कुल 16 लाख रुपये लेने का आरोप है। पुलिस ने पहले धारा 420 के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच के बाद डोमन को सात अगस्त 2026 को गिरफ्तार किया गया और चालान प्रस्तुत किया गया। बचाव पक्ष ने इसे उधार की रकम का विवाद बताते हुए जमानत मांगी और कहा कि आरोपित का कोई आपराधिक पूर्व इतिहास नहीं है। अभियोजन ने विरोध किया।

अदालत ने अभिलेख में प्रथम दृष्टया संलिप्तता और बैंक खाते में राशि के लेन-देन को देखते हुए जमानत आवेदन धारा 483 भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत निरस्त कर दिया।

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