राष्ट्रवाणी: राहुन त्रिपाठी , बिलासपुर: कारगिल युद्ध की कहानी केवल मोर्चे पर दुश्मन से लड़ने वाले सैनिकों तक सीमित नहीं है। इस विजय के पीछे ऐसे भी योद्धा थे, जिन्होंने तकनीकी सहायता और रसद आपूर्ति के जरिए सेना की ताकत बनाए रखी। बिलासपुर के होनरी कैप्टन रविन्द्रनाथ गोपाल और सुबेदार मेजर मोहनलाल ऐसे ही दो अनसुने नायक हैं। एक ने माइनस 20 डिग्री तापमान में बफोर्स और आईएफजी तोपों को हर समय युद्ध के लिए तैयार रखा, जबकि दूसरे ने दुश्मन की गोलाबारी के बीच सेना तक हथियार, गोला-बारूद, राशन और जरूरी सामग्री पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाई। जीत केवल मोर्चे पर नहीं, व्यवस्था में भी मिली
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