राष्ट्रवाणी: History Of Jhakal Village: झुंझुनूं का जाखल करीब 300 साल पुराने इतिहास, बाबा सुंदरदास की तपोस्थली और प्रसिद्ध सावन तीज मेले के लिए जाना जाता है. लेकिन इस कस्बे की सबसे अनूठी पहचान है 700 लोगों का सेवा संकल्प, जहां हर सदस्य रोजाना एक रुपया जमा करता है. इसी छोटी-सी पहल से संस्था अब तक जरूरतमंदों को करीब 25 लाख रुपए की मदद दे चुकी है.
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