राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुरः फसलों की सुरक्षा के नाम पर बनाए गए अस्थायी बाड़ेनुमा गोठान अब बेजुबानों के लिए साक्षात काल साबित हो रहे हैं। सीपत तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत झलमला में बनाए गए अस्थायी गोठान में बीते दो दिन के भीतर कीचड़ में धंसने और भूख-प्यास के कारण मवेशियों की तड़प-तड़पकर मौत हो गई।

गांव के सरपंच का कहना है कि दो दिनों में 14 मवेशियों की मौत हुई है। वहीं ग्रामीण मृत मवेशियों की संख्या 30 से ज्यादा बता रहे हैं। इस दर्दनाक घटना के बाद पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया है।

खेतों में फसलों को बचाने के लिए दो माह पूर्व खुले मैदान में तार फेंसिंग कर यह अस्थायी गोठान तैयार किया गया था, जहां 300 से अधिक मवेशियों को ठूंस दिया गया था। लगातार बारिश के चलते पूरा परिसर गहरे दलदल में बदल गया। न तो सिर छिपाने के लिए शेड था और न ही पेट भरने के लिए चारे-पानी का उचित इंतजाम।

ग्रामीणों का कहना है कि शनिवार को 23 और रविवार को आठ मवेशियों ने घुटनों तक कीचड़ में धंसकर दम तोड़ दिया। विशेष योजना के तहत पैरा जुटाने के दावों के बीच मवेशियों को भूखा रखा गया। हद तो तब हो गई जब मौतों को छुपाने के लिए बैकहो लोडर से शवों को आनन-फानन में दफनाने और कुछ को नाले में बहाने के गंभीर आरोप भी सामने आए हैं।

हालांकि सरपंच 14 मौतों की बात कहते हुए बीमारी का हवाला दे रहे हैं, लेकिन आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और एफआइआर दर्ज करने की मांग की है। मस्तूरी के ग्राम जैतपुर स्थित श्रीधाम गोधाम में लीलागर नदी की बाढ़ का पानी भरने के बाद पूर्व में नौ गायों की मौत हो गई थी।

गोधाम में घुटनों तक दलदल में खड़े 200 से अधिक मवेशी खुले आसमान के नीचे तिल-तिल कर मरने को मजबूर थे। मामले की जानकारी लगते ही पशु चिकित्सा विभाग की टीम ने मवेशियों को दलदल युक्त गोधाम से बाहर निकल कर सुरक्षित किया था। मस्तूरी क्षेत्र के ओखर गोधाम में भी पूर्व में छह मवेशियों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया था।

इस घटना को लेकर क्षेत्र में भारी आक्रोश पनपा था। ओखर की घटना से सबक लेने के बजाय जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते झलमला में यह घटना हो गई। वही मस्तुरी क्षेत्र में एक के बाद एक बेजुबानों की मौत का सिलसिला जारी है।

गोठान में शनिवार को छह और रविवार को आठ मिलाकर कुल 14 मवेशियों की मौत हुई है। चारे और पानी की समुचित व्यवस्था थी। बारिश और बीमारी के चलते मवेशी मरे हैं।

संक्रमण व दुर्गंध न फैले इसलिए शवों को दफनाया गया। अस्थायी गोठान का संचालन पंचायत नहीं, बल्कि स्थानीय किसान कर रहे थे। धनलाल साहू, सरपंच ग्राम पंचायत झलमला अस्थाई गोठानों में मवेशियों को रखने की व्यवस्था पंचायत स्तर पर की जाती है, वहां पर बदहाली और मौत की जानकारी मिली है।

पशु चिकित्सा विभाग की टीम मौके पर भेजकर जांच कराई जाएगी। गायों की मौत बेहद गंभीर मामला है। शासन के संज्ञान में लाकर पशु अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत अपराध दर्ज कराकर संबंधितों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

धीरेंद्र दुबे, जिला अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version