राष्ट्रवाणी: Diesel Export Hike: भारत ने सितंबर में डीजल निर्यात में एक साल का उच्चतम स्तर हासिल किया, जिसमें लगभग आधा निर्यात यूरोप को हुआ। भारत ने 1 साल में सबसे ज्यादा डीजल किया एक्सपोर्ट सितंबर में भारत का डीजल निर्यात एक साल के उच्चतम स्तर पर। कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा यूरोप को भेजा गया।
उच्च रिफाइनिंग मार्जिन ने निर्यात बढ़ाने में मदद की। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली: भारत ने सितंबर में डीजल एक्सपोर्ट (Diesel export) के मामले में बड़ी छलांग लगाई है। देश से डीजल का निर्यात पिछले एक साल के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया।
खास बात यह है कि भारत से भेजे गए डीजल की करीब आधा हिस्सा यूरोप पहुंचा। दुनिया के कई हिस्सों में डीजल की सप्लाई घटने और कीमतों में तेज उछाल के बीच भारतीय रिफाइनरों के लिए एक्सपोर्ट का यह मौका काफी फायदेमंद साबित हुआ है। कमोडिटी एनालिटिक्स फर्म Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में भारत ने रोजाना करीब 6.20 लाख बैरल डीजल का निर्यात किया।
इसमें से लगभग 2.80 लाख बैरल प्रतिदिन यूरोप (europe) भेजा गया। अगस्त के मुकाबले यूरोप को भारत का डीजल एक्सपोर्ट करीब 80% बढ़ गया। इसके अलावा करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन अफ्रीका (Africa), 50 हजार बैरल एशिया (asia) और 40 हजार बैरल अमेरिका (america) भेजा गया।
करीब 50 हजार बैरल किस देश में गया स्पष्ट नहीं किया गया। वहीं, सितंबर में रूस (Russia) को भारत से डीजल की कोई खेप नहीं भेजी गई, जबकि इससे पहले कुछ महीनों में रूस को शिपमेंट गया था। सितंबर में डीजल की कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन में जोरदार तेजी देखने को मिली।
Kpler के लीड एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक, सितंबर में दुबई क्रूड के मुकाबले सिंगापुर डीजल क्रैक 60 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर था। यानी रिफाइनरों को डीजल बनाने और उसे विदेशों में बेचने पर काफी बेहतर मार्जिन मिल रहा था। यही वजह रही कि रिफाइनरों ने उत्पादन और एक्सपोर्ट दोनों बढ़ाए।
भारत से डीजल एक्सपोर्ट में रिलायंस इंडस्ट्रीज सबसे बड़ी कंपनी है। जामनगर स्थित उसकी एक्सपोर्ट-ओनली रिफाइनिंग यूनिट इस कारोबार में अहम भूमिका निभाती है। सितंबर में डीजल एक्सपोर्ट पर करीब 37 डॉलर प्रति बैरल का विंडफॉल टैक्स था, जो एक्सपोर्टर्स के मार्जिन को काफी कम करता है।
हालांकि, यह टैक्स रिलायंस की एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड जामनगर यूनिट पर लागू नहीं होता।
