राष्ट्रवाणी: ब्रिटेन ने ऐसा क्या किया जिससे इजरायल की नींव पड़ी? पहले विश्व युद्ध यानी 1914-1918 के दौरान ब्रिटेन ने ऑटोमन साम्राज्य को हरा दिया, जिसके कंट्रोल में फिलिस्तीन का इलाका आता था. युद्ध के बाद राष्ट्र संघ ने ब्रिटेन को फिलिस्तीन पर शासन करने का जनादेश दे दिया. ब्रिटेन के इस कदम और नीति से इजरायल के गठन की नींव पड़ी. ब्रिटेन का स्वार्थ और जियोपॉलिटिक्स
- ब्रिटेन ने यह कदम केवल सहानुभूति में नहीं उठाया था।
- दूसरे विश्व युद्ध के बाद हिंसक झड़पों से तंग आकर ब्रिटेन ने 1947 में फिलिस्तीन का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया।
ब्रिटेन ने यह कदम केवल सहानुभूति में नहीं उठाया था. इसके पीछे मुख्य रूप से तीन बड़े रणनीतिक कारण थे. बालफोर से 1948 में इजरायल का जन्म
दूसरे विश्व युद्ध के बाद हिंसक झड़पों से तंग आकर ब्रिटेन ने 1947 में फिलिस्तीन का मुद्दा संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया. 29 नवंबर 1947 को संयुक्त राष्ट्र ने प्रस्ताव 181 के तहत फिलिस्तीन को दो हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया. एक यहूदी राज्य और एक अरब राज्य. 14 मई 1948 के दिन ब्रिटिश जनादेश खत्म होते ही यहूदी नेताओं ने इजरायल राज्य के गठन की घोषणा कर दी. इसके तुरंत बाद पहला अरब-इजरायल युद्ध छिड़ गया. और फिलिस्तीनियों के लिए नकबा की शुरुआत हुई, जिसका मतलब तबाही होता है. बालफोर घोषणापत्र इतिहास के सबसे विवादास्पद दस्तावेजों में से एक है. यहूदियों के लिए यह 2000 साल बाद अपनी ऐतिहासिक मातृभूमि में लौटने का मील का पत्थर साबित हुआ, वहीं फिलिस्तीनियों के लिए यह उनके अपने देश और अधिकारों की छीना-झपटी की शुरुआत थी. दोनों पक्ष के ये दो पहलू हैं, जिसका खमियाजा पूरा मिडिल ईस्ट भुगत रहा है. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

