राष्ट्रवाणी: Kota Pannalal Pakodi Success Journey: किसी शहर की पहचान सिर्फ उसकी इमारतों और इतिहास से नहीं, बल्कि वहां के जायके से भी बनती है. कोटा में पन्नालाल पकौड़ी वाला ऐसी ही एक पहचान है, जिसका स्वाद करीब 70 साल से लोगों की पसंद बना हुआ है. कोटा दरबार के दौर में किशोरपुरा दरवाजे के पास एक छोटी गुमटी और ठेले से शुरू हुआ यह कारोबार आज पांच पीढ़ियों की मेहनत और विरासत बन चुका है. दादा से पिता और फिर अगली पीढ़ियों तक पहुंची इस दुकान ने दशहरा मेले में अपनी अलग जगह बनाई है. मेले में आने वाले कई परिवार पन्नालाल की पकौड़ी का स्वाद चखे बिना लौटना नहीं चाहते. पकौड़ी के अलावा मटका कुल्फी भी सालभर ग्राहकों को आकर्षित करती है. सुनील कुमार वैष्णव के मुताबिक, कारोबार की असली ताकत मसालों, बेसन और तेल की गुणवत्ता के साथ ग्राहकों का भरोसा है. यही वजह है कि बदलते समय के बावजूद इस परिवार ने अपने स्वाद और पहचान को कायम रखा है.
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