तेहरान/लाहौर. ईरान ने अपने तीन प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिका द्वारा की गई बमबारी का बदला लेने का संकल्प लेते हुए रविवार को कहा कि अमेरिकी हमलों के ”दीर्घकालिक परिणाम” होंगे. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची की यह प्रतिक्रिया उसके तीन परमाणु प्रतिष्ठानों फोर्दो, नतांज और इस्फहान में अमेरिका द्वारा बी2 बमवर्षकों के जरिये घातक ‘बंकर बस्टर’ बम गिराये जाने के कुछ घंटों बाद आई.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद दावा किया कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान ”पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं.” अरागची ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के शांतिपूर्ण तरीके से संचालित हो रहे परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला कर संयुक्त राष्ट्र घोषाणा पत्र, अंतरराष्ट्रीय कानून और परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) का ”गंभीर उल्लंघन” किया है.
उन्होंने कहा, ”आज सुबह की घटनाएं अपमानजनक हैं और इनके दीर्घकालिक परिणाम होंगे. संयुक्त राष्ट्र के प्रत्येक सदस्य को इस अत्यंत खतरनाक, अराजक और आपराधिक व्यवहार से चिंतित होना चाहिए.” ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम की खबर के अनुसार, विदेश मंत्री ने कहा कि उनका देश अपनी ”संप्रभुता, हित और लोगों” की रक्षा के लिए ”सभी विकल्प” सुरक्षित रखे हुए है. अरागची ने कहा कि वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए मॉस्को जा रहे हैं. ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि अमेरिकी हमले ने ईरान को आत्मरक्षा में कार्रवाई करने का वैध अधिकार दिया है, जिसमें ”आक्रामक गठबंधन के आकलन से भी परे जाने का विकल्प” भी शामिल हैं.
अमेरिका ने खुद ईरान के खिलाफ खतरनाक युद्ध छेड़ दिया है: ईरानी विदेश मंत्रालय
ईरान के विदेश मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अमेरिका ने इस्लामिक गणराज्य में तीन परमाणु ठिकानों पर हमला कर खुद ईरान के खिलाफ एक खतरनाक युद्ध की शुरुआत कर दी है. मंत्रालय ने रविवार सुबह जारी एक विस्तृत बयान में यह टिप्पणी की.
मंत्रालय ने कहा, “दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि अमेरिका ने एक जारी कूटनीतिक प्रक्रिया के बीच इजराइल जैसे नरसंहारकारी और कानूनविहीन शासन का समर्थन कर कूटनीति के साथ विश्वासघात किया है.” बयान में कहा गया, “अब, यहूदी शासन द्वारा किए गए उल्लंघनों और अपराधों की श्रृंखला को पूरा करके अमेरिका ने स्वयं ईरान के खिलाफ एक खतरनाक युद्ध शुरू कर दिया है.”
पाकिस्तान ने ईरान के परमाणु स्थलों पर अमेरिका के हमलों की निंदा की
पाकिस्तान ने रविवार को ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी हमलों की निंदा की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया. इसके साथ ही पाकिस्तान ने क्षेत्र में हिंसा के और बढ़ने की आशंका भी जताई है. इससे एक दिन पहले ही पाकिस्तान ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का समर्थन किया था. अमेरिका ने रविवार की सुबह ईरान के फोर्दो, इस्फहान और नतांज परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला किया, जिसका उद्देश्य देश के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करना था.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर ईरान ने जवाबी कार्रवाई की तो और हमले किए जाएंगे.
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, पाकिस्तान के विदेश कार्यालय (एफओ) ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तान ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिकी हमलों की निंदा करता है. हम इस क्षेत्र में तनाव के और बढ़ने की आशंका से बेहद चिंतित हैं.” पाकिस्तान ने कहा कि ये हमले “अंतरराष्ट्रीय कानून के सभी मानदंडों का उल्लंघन हैं” और ईरान को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत खुद का बचाव करने का वैध अधिकार है.
एफओ ने कहा, “ईरान के खिलाफ जारी हमलों के कारण तनाव और हिंसा में अभूतपूर्व वृद्धि बेहद चिंताजनक है. तनाव बढ़ने से इस क्षेत्र और दूसरे क्षेत्रों के लिए हानिकारक परिणाम होंगे.” दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान सरकार ने शनिवार को कहा था कि वह हाल ही में भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के “निर्णायक कूटनीतिक हस्तक्षेप” के लिए औपचारिक रूप से उनके नाम की सिफारिश 2026 के नोबेल शांति पुरस्कार के लिए करेगी.

