राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने दुर्ग के बहुचर्चित ट्रिपल मर्डर मामले में अहम फैसला सुनाते हुए पत्नी, डेढ़ माह की मासूम बेटी और एक अन्य युवक की हत्या के दोषी रवि शर्मा की दोषसिद्धि बरकरार रखी है, लेकिन उसे ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई फांसी की सजा को बदलकर शेष प्राकृतिक जीवन तक बिना किसी वैधानिक रिहाई या रिमिशन के आजीवन कारावास में परिवर्तित कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने कहा कि मृत्युदंड केवल अत्यंत असाधारण और “रेयरेस्ट ऑफ रेयर” मामलों में ही दिया जा सकता है और वर्तमान मामला उस कसौटी पर नहीं उतरता। डिवीजन बेंच ने ट्रायल कोर्ट द्वारा हत्या और साक्ष्य मिटाने के अपराध में की गई दोषसिद्धि को सही ठहराया। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की ऐसी मजबूत और पूर्ण श्रृंखला प्रस्तुत की है, जिससे केवल आरोपी का ही दोष सिद्ध होता है। आरोपी ने पहले पत्नी, डेढ़ माह की बच्ची और एन. राजू को नींद की गोलियां देकर बेहोश किया, फिर टेप से हाथ-पैर और मुंह बांधकर दम घोंटकर हत्या कर दी। इसके बाद एन. राजू के शव को जलाकर ऐसा दिखाने की कोशिश की कि उसकी जगह स्वयं आरोपी की मौत हुई है। हाई कोर्ट ने कहा कि घटना के तुरंत बाद मृतका मंजू शर्मा के मोबाइल से उसकी मां को किए गए कॉल, वही मोबाइल आरोपी से बरामद होना, घटनास्थल से मिले टेप का आरोपी से बरामद टेप से एफएसएल में मेल खाना, नींद की दवा “अल्प्रेक्स” के रैपर की बरामदगी, घटनास्थल पर लिखे गए भ्रामक संदेश का आरोपी की हैंडराइटिंग से मिलना और घटना के बाद रेलवे टिकट लेकर फरार होना, सभी परिस्थितियां आरोपी के खिलाफ मजबूत साक्ष्य हैं। कोर्ट ने यह भी माना कि आरोपी घटना के बाद बिना किसी को सूचना दिए फरार हो गया और उसने साक्ष्य मिटाने तथा पुलिस को गुमराह करने का सुनियोजित प्रयास किया। हाई कोर्ट ने कहा कि अपराध निस्संदेह अत्यंत जघन्य और सुनियोजित है। इसमें पत्नी, मासूम बच्ची और एक निर्दोष व्यक्ति की हत्या की गई, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित सिद्धांतों के अनुसार मृत्युदंड तभी दिया जा सकता है, जब आजीवन कारावास का विकल्प पूरी तरह अनुपयुक्त हो और सुधार की संभावना समाप्त हो। इस मामले में ऐसी स्थिति नहीं पाई गई। इसी आधार पर अदालत ने ट्रायल कोर्ट द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा को निरस्त करते हुए रवि शर्मा को शेष प्राकृतिक जीवन तक बिना किसी रिमिशन या समयपूर्व रिहाई के आजीवन कारावास की सजा सुनाई। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 72 और 161 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपाल की संवैधानिक शक्तियां यथावत रहेंगी। हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट द्वारा भेजे गए डेथ रेफरेंस को भी खारिज कर दिया और आरोपी की अपील केवल सजा में संशोधन तक आंशिक रूप से स्वीकार की।
Trending
- केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए केंद्र ने महंगाई भत्ता बढ़ाकर 63% किया; 3% वृद्धि 1 जुलाई से प्रभावी – भारतीय पीएसयू
- कोयला खदानों, बिजली संयंत्रों, इस्पात संयंत्रों, बंदरगाहों और हवाई अड्डों पर सुरक्षा मजबूत करने के लिए सीआईएसएफ का पुनर्गठन – भारतीय पीएसयू
- भारतीय पीएसयू – बीआईडीयू की बैठक में बोकारो स्टील प्लांट के कर्मचारियों ने सुरक्षा, कल्याण और करियर संबंधी मांगें उठाईं
- घाव हरा-भरा, पोर्टल पर ‘क्लोज’ का ठप्पा, छत्तीसगढ़ में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों को फर्जी तरीके से बंद करने पर अफसरों को चेतावनी – राष्ट्रवाणी
- सूरजपुर: में घर में घुसे नकाबपोशों ने बच्ची के गले पर चाकू अड़ाकर शिक्षक के घर से डेढ़ लाख रुपये लूटे – राष्ट्रवाणी
- सूरजपुर: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में पागल कुत्ते के काटने के बाद झोलाछाप ने लगा दिए टांके, साढ़े तीन साल के मासूम की मौत – राष्ट्रवाणी
- छत्तीसगढ़ में बीपीटी की खाली 36 सीटों पर होगा दाखिला, स्ट्रे वैकेंसी राउंड की प्रक्रिया शुरू – राष्ट्रवाणी
- एनएलएमसी ने नीलामी से 35 आरआईएनएल प्लॉट वापस ले लिए, बोली लगाने की समय सीमा 1 नवंबर तक बढ़ा दी – भारतीय पीएसयू

