राष्ट्रवाणी: राज्य ब्यूरो, , रायपुर। भारतीय जनता पार्टी में संगठनात्मक असंतोष और अंदरूनी खींचतान अब सतह पर आने लगी है। बीते एक माह के भीतर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से पार्टी नेताओं और निष्ठावान कार्यकर्ताओं की नाराजगी के मामले लगातार सामने आए हैं। विधानसभा अध्यक्ष डा. रमन सिंह के प्रभाव वाले राजनांदगांव से लेकर भिलाई, महासमुंद और बेमेतरा तक फैली यह गुटबाजी आगामी चुनावी रणनीति के लिहाज से भाजपा नेतृत्व के लिए बड़ा सिरदर्द बनती दिख रही है। राजनीतिक हलचलों का ताजा केंद्र राजनांदगांव का डोंगरगढ़ बना है, जहां अनुशासनहीनता का हवाला देते हुए संगठन ने पांच प्रमुख स्थानीय नेताओं प्रिंस कक्कड़, वीरेंद्र साहू, अनिल पांडे, परविंदर सिंह मोंटी और संतोष राव को छह साल के लिए निष्कासित कर दिया। इसके बाद डोंगरगढ़ शहर मंडल के 111 कार्यकर्ताओं और बाद में 26 अन्य पदाधिकारियों ने सामूहिक रूप से इस्तीफा देकर संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटनाक्रम इसलिए भी चिंताजनक है, क्योंकि हाल ही में कवर्धा में डाॅ. रमन सिंह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संयम बरतने और मिले पदों से संतुष्ट होकर अगले कार्यकाल की तैयारी में जुटने की सीख दी थी। संगठनात्मक असंतोष केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। बेमेतरा जिले के थानखम्हरिया में एल्डरमैन के शपथ ग्रहण समारोह में विधायक ईश्वर साहू की मौजूदगी के बावजूद भाजपा समर्थित सभी 15 पार्षदों का नदारद रहना अंदरूनी खींचतान की गवाही दे चुका है। इसी प्रकार, भिलाई में भाजयुमो जिलाध्यक्ष द्वारा जारी मंडल अध्यक्षों की सूची को 10 मंडल अध्यक्षों द्वारा खारिज कर अपनी समानांतर सूची जारी करना भी संगठन में असंतोष को दर्शाता है। प्रदेश कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता धनंजय सिंह ठाकुर ने कहा कि राज्य की भाजपा सरकार के ढाई साल के कार्यकाल में ही आंतरिक भगदड़ मच गई है। नौकरशाही के हावी होने और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से पार्टी के सांसद, विधायक व कार्यकर्ता आक्रोश में हैं। ठाकुर ने सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विजय बघेल, भोजराज नाग और विधायक इंद्र कुमार साहू के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि बेलगाम अपराध, महंगाई, भ्रष्टाचार और लचर प्रशासनिक व्यवस्था से जनता त्रस्त है। कांग्रेस के हमलों का जवाब देते हुए भाजपा के प्रदेश महामंत्री डाॅ. नवीन मार्कण्डेय ने कहा कि भाजपा एक लोकतांत्रिक और अनुशासित दल है, जहां अनुशासन सर्वोपरि है। कांग्रेस को दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपनी स्थिति देखनी चाहिए। कांग्रेस खुद अनगिनत गुटों में बंटी हुई है, जहां न कार्यकर्ताओं पर नियंत्रण है और न ही शीर्ष नेतृत्व की कोई पकड़। इसी बिखराव और गुटबाजी के चलते जनता ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखाया है।
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