भारतीय क्रिकेट में आज फिर एक बार गंदी राजनीति का काला खेल बेपर्दा हुआ है। 15 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में अफगानिस्तान के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले से पहले टीम चयन को लेकर ऐसा बवाल खड़ा हो गया है जिसने पूरे देश के फैंस का खून खौला दिया है।
पहले मैच में फ्लॉप साबित होने के बाद केरल के स्टार बल्लेबाज संजू सैमसन के खिलाफ जिस तरह का माहौल बनाया जा रहा है, उसने साफ कर दिया है कि भारतीय ड्रेसिंग रूम में सब कुछ ठीक नहीं है। बीसीसीआई के अंदर बैठे आकाओं ने अपने चहेतों को बचाकर संजू को बलि का बकरा बनाने का पूरा प्लान तैयार कर लिया है। अभिषेक शर्मा के तूफानी 82 रनों के आगोश में छिपकर मैनेजमेंट उस धाकड़ खिलाड़ी को टीम से बाहर फेंकने की फिराक में है, जिसने हमेशा देश के लिए निस्वार्थ क्रिकेट खेला है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब संजू सैमसन के साथ यह अन्याय हुआ हो। एक मैच में शून्य या कम स्कोर पर आउट होते ही बीसीसीआई की कुल्हाड़ी सीधे संजू की गर्दन पर गिरती है, जबकि टीम के दूसरे ‘सुपरस्टार्स’ को लगातार दर्जनों मौके दिए जाते हैं। क्या भारतीय टीम सिर्फ कुछ चुनिंदा खिलाड़ियों का अखाड़ा बन कर रह गई है? अफगानिस्तान जैसी टीम के खिलाफ अगर मैनेजमेंट अपने खिलाड़ियों का भरोसा नहीं बढ़ा सकता, तो आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में यह टीम क्या खाक प्रदर्शन करेगी? यह सिर्फ चयन का मुद्दा नहीं, बल्कि एक होनहार खिलाड़ी का करियर खुलेआम बर्पाद करने की सोची-समझी साजिश है, जिसे क्रिकेट फैंस अब किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

