राष्ट्रवाणी: भारत में कई ऐसे ब्रांड्स हैं जिनकी शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी गुणवत्ता और मेहनत के दम पर उन्होंने देश-विदेश में पहचान बनाई। विदेशी नहीं, 100% देसी हैं ये 8 मशहूर ब्रांड्स! पारले-जी ने 1929 में छोटी फैक्ट्री से शुरू होकर वैश्विक पहचान बनाई।
वाडीलाल ने पारंपरिक आइसक्रीम से शुरुआत कर 200 से अधिक फ्लेवर बनाए। कल्याण ज्वेलर्स, हाईडिजाइन जैसे ब्रांड्स ने भी छोटे स्तर से बड़ी सफलता पाई। बिजनेस डेस्क,नई दिल्ली: भारत में कई ऐसे ब्रांड हैं, जिनकी शुरुआत बेहद छोटे स्तर से हुई, लेकिन अपनी क्वालिटी, मेहनत और अलग पहचान के दम पर उन्होंने देश ही नहीं, विदेशों तक अपनी जगह बनाई।
इनमें बिस्कुट से लेकर आइसक्रीम, ज्वेलरी, फैशन और रेस्टोरेंट तक के ब्रांड शामिल हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई कंपनियों की शुरुआत किसी बड़े कॉर्पोरेट ऑफिस से नहीं, बल्कि छोटी दुकान या वर्कशॉप से हुई थी। पारले-जी (Parle-G) आज भारत के सबसे पहचाने जाने वाले बिस्कुट ब्रांड्स में से एक है।
इसकी शुरुआत 1929 में मुंबई के विले पारले इलाके में मोहनलाल दयाल ने की थी। उन्होंने एक पुरानी बंद फैक्ट्री खरीदकर कन्फेक्शनरी का काम शुरू किया था। जर्मनी से कन्फेक्शनरी बनाने की कला सीखने के बाद वे मशीन लेकर भारत लौटे और परिवार के 12 लोगों के साथ काम शुरू किया।
आज पारले-जी की देशभर में 130 से ज्यादा फैक्ट्रियां हैं। कंपनी हर महीने 100 करोड़ से ज्यादा बिस्कुट पैकेट का उत्पादन करती है और इसके प्रोडक्ट्स 21 से ज्यादा देशों में एक्सपोर्ट होते हैं। वाडीलाल की शुरुआत 1907 में अहदाबाद के वाडीलाल गांधी ने की थी।
शुरुआत में पारंपरिक कोठी यानी हाथ से चलने वाली देसी आईसक्रीम मशीन से आइसक्रीम बनाने और बेचने का काम शुरू हुआ। चार पीढ़ियों से ज्यादा का सफर पूरा कर चुका यह ब्रांड आज देश के जाने-माने आइसक्रीम ब्रांड्स में शामिल है और इसके पास 200 से ज्यादा फ्लेवर हैं। कल्याण ज्वेलर्स की स्थापना 1993 में केरल के त्रिशूर जिले में हुई थी।
इसके चेयरमैन और एमडी टी.एस. कल्याणरमण ने अपने करियर की शुरुआत कपड़ों की एक छोटी दुकान से की थी। पढ़ाई के साथ उन्होंने कारोबार संभाला और आगे चलकर ज्वेलरी बिजनेस को बड़े ब्रांड में बदल दिया। आज कल्याण ज्वेलर्स के करीब 105 शोरूम भारत और पश्चिम एशिया में मौजूद हैं।
दिलीप कपूर ने 1978 में पुद्दुचेरी में एक वर्कशॉप के तौर पर लेदर का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे यही काम हाईडिजाइन ब्रांड में बदल गया। कंपनी प्रीमियम लेदर बैग और बेल्ट बनाती है और अपनी क्वालिटी व कस्टमाइज्ड प्रोडक्ट्स के लिए जानी जाती है।
आज इस ब्रांड के भारत समेत 23 देशों में शोरूम मौजूद हैं। कॉफी किंग के नाम से मशहूर वी.जी सिद्धार्थ कर्नाटक के चिकमंगलूर के कॉफी उगाने वाले परिवार से आते थे। उनकी सपना इन्वेस्टमेंट बैंकर बनने का था, लेकिन कॉफी से उनका रिश्ता उन्हें इसी कारोबार में ले आया।
उन्होंने कॉफी फार्म खरीदे और बाद में कैफे कॉफी डे की शुरुआत की। मोंटे कार्लो की कहानी ओसवाल वूलन मिल्स से जुड़ी है, जिसकी स्थापना 1949 में हुई थी। 1984 में मोंटे कार्लो को ब्रांड के तौर पर लॉन्च किया गया था।
सर्दियों के कपड़ों, खासकर स्वेटर और जैकेट के लिए इस ब्रांड ने भारतीय बाजार में अपनी अलग पहचान बनाई और यह भारत के शुरुआती फैशन परिधान ब्रांड्स में शामिल हुआ। अहमदाबाद की अरविंद मिल्स ने 1980 में फ्लाइंग मशीन लॉन्च की। उस समय भारत में ब्रांडेड जींस का बाजार काफी हद तक विदेशी ब्रांड्स पर निर्भर था।
ऐसे दौर में भारतीय ग्राहकों के लिए कम कीमत में जींस उपलब्ध कराने के मकसद से इसे शुरू किया गया। 1994 तक फ्लाइंग मशीन भारत में ब्रांडेड जींस के क्षेत्र में अग्रणी बन गई और आज भी इसे ट्रेंडी और प्रीमियम ब्रांड के तौर पर देखा जाता है। 1954 में लॉन्च हुई ओल्ड मॉन्क भारत की मशहूर डार्क रम ब्रांड्स में से एक है।
इसकी खास बात यह है कि इसका उत्पादन उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में होता है, लेकिन इसकी पहचान भारत तक सीमित नहीं रही और इसे विदेशों में भी पसंद किया जाता है।

