राष्ट्रवाणी: भारतीय अर्थव्यवस्था ने सितंबर में जीएसटी कलेक्शन और मैन्युफैक्चरिंग में मजबूती दिखाई, लेकिन ऑटोमोबाइल सेक्टर में शहरी और ग्रामीण मांग के बीच अंतर स्पष्ट हुआ। इकॉनमी में दिखी अलग-अलग तस्वीरें (एआई Image) सितंबर में जीएसटी कलेक्शन ₹2.04 लाख करोड़, 14.7% की वृद्धि दर्ज।
मैन्युफैक्चरिंग PMI 55.1 पहुंचा, सात महीनों का सबसे मजबूत स्तर। शहरी ऑटो बिक्री में उछाल, ग्रामीण ट्रैक्टर बिक्री में गिरावट दिखी। बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली| फाइनेंशियल ईयर 2026-27 की दूसरी तिमाही के आखिरी महीने सितंबर में भारतीय अर्थव्यवस्था के कई प्रमुख इंडेक्स ने मजबूती दिखाई है।
जीएसटी कलेक्शन, मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल भुगतान में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि ऑटोमोबाइल सेक्टर के आंकड़ों ने शहरी और ग्रामीण मांग के बीच बढ़ते अंतर की ओर इशारा किया है। इससे संकेत मिलता है कि अर्थव्यवस्था की रफ्तार बनी हुई है, लेकिन सभी क्षेत्रों में समान रूप से सुधार नहीं हो रहा है।
सितंबर में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन 14.7 फीसदी बढ़कर ₹2.04 लाख करोड़ पर पहुंच गया। यह लगातार तीसरा महीना है जब जीएसटी कलेक्शन ₹2 लाख करोड़ के लेवल से ऊपर रहा है। पिछले साल इस महीने में यह आंकड़ा ₹1.77 लाख करोड़ था।
घरेलू लेनदेन से मिलने वाले जीएसटी के रेवेन्यू में 10.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई और ये ₹1.38 लाख करोड़ रहा, जबकि इंपोर्ट से मिलने वाला जीएसटी 25.9 प्रतिशत बढ़कर ₹65,525 करोड़ तक पहुंच गया। एक्सपर्ट्स के मुताबिक त्योहारी सीजन की तैयारियों और बेहतर टैक्स कंप्लायंस का असर कलेक्शन में साफ दिखाई दे रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की बात करें तो सितंबर के दौरान जबरदस्त सुधार दर्ज किया गया। HSBC इंडिया मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) अगस्त के 52.8 से बढ़कर सितंबर में 55.1 पर पहुंच गया, जो पिछले सात महीनों का सबसे मजबूत स्तर है। इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य उत्पाद, दवा और कपड़ा क्षेत्रों से मांग बढ़ने के कारण नए ऑर्डर फरवरी के बाद सबसे तेज गति से बढ़े।
प्रोडक्शन में चार महीनों की सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि पूरे जुलाई-सितंबर तिमाही का औसत PMI 53.8 रहा, जो 2021 के बाद का सबसे कमजोर तिमाही औसत है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ऑटोमोबाइल सेक्टर के आंकड़ों ने इकॉनमी में मिलाजुला संकेत दिखाया है।
यात्री वाहन कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत रहा। मारुति सुजुकी की कुल बिक्री 24 प्रतिशत बढ़कर 2.36 लाख यूनिट रही, जबकि घरेलू पैसेंजर वाहन बिक्री में 37 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। महिंद्रा एंड महिंद्रा की कुल वाहन बिक्री में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और हुंडई मोटर इंडिया की बिक्री में भी करीब 11 प्रतिशत का इजाफा हुआ।
टाटा मोटर्स के कॉमर्शियल वाहनों की बिक्री 42.4 प्रतिशत बढ़ी। इसके उलट ग्रामीण मांग से जुड़े सेगमेंट दबाव में दिखाई दिए। महिंद्रा की ट्रैक्टर बिक्री में 21 फीसदी की गिरावट आई है और बिक्री 52,100 यूनिट रह गई, जबकि एस्कॉर्ट्स कुबोटा की ट्रैक्टर बिक्री में 16.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
हालांकि बजाज ऑटो की कुल बिक्री में 5 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन इसका मुख्य कारण एक्सपोर्ट में 32 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। कंपनी की घरेलू बिक्री 9 प्रतिशत और डोमेस्टिक टू व्हीलर्स की बिक्री में 12 प्रतिशत की गिरावट आई है।

