राष्ट्रवाणी: पतली कमर पाने के लिए महिलाएं ‘रिब रीमॉडलिंग’ जैसी खतरनाक कॉस्मेटिक सर्जरी करवा रही हैं, जिसमें पसलियों को बदला जाता है। महिलाओं में बढ़ रहा है रिब रीमॉडलिंग का ट्रेंड (Picture Courtesy: Freepik) रिब रीमॉडलिंग पतली कमर के लिए खतरनाक कॉस्मेटिक सर्जरी है इसमें निचली पसलियों को मोड़कर कमर पतली की जाती है सर्जरी में न्यूमोथोरैक्स, हीमोथोरैक्स जैसे जानलेवा जोखिम हैं लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
आज के दौर में कॉस्मेटिक सर्जरी का चलन इतना बढ़ गया है कि लोग अपनी जान जोखिम में डालने से भी नहीं कतरा रहे हैं। पहले स्लिम कमर पाने के लिए जिम में घंटों पसीना बहाना पड़ता था और स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो करनी पड़ती थी, लेकिन अब ये ट्रेंड बदल चुका है। खूबसूरत दिखने की चाह में अब महिलाएं अपनी पसलियां तक तुड़वाने लगी हैं।
जी हां, ये कॉस्मेटिक सर्जरी का एक खतरनाक रूप है, जिसे रिब रीमॉडलिंग कहा जाता है। महिलाओं के बीच इस सर्जरी का चलन तेजी से बढ़ रहा है। आइए जानें क्या होती है रिब रीमॉडलिंग।
कमर को पतला दिखाने के लिए इस सर्जरी का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें निचली पसलियों की स्थिति और उनके आकार में बदलाव किया जाता है। इस प्रक्रिया में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया दिया जाता है और छोट-छोटे चीरे लगाकर खास टूल्स की मदद से नीचे की दो पसलियों की बाहरी परत को कमजोर किया जाता है।
इसके बाद उन्हें अंदर ही मोड़ा जाता है, ताकि कमर का घेरा छोटा नजर आए। इस सर्जरी के बाद का सफर और भी दर्दनाक होता है। हड्डियों को नई पोजीशन में जोड़ने के लिए मरीज को करीब तीन महीने तक हर दिन 23 घंटे एक खास मेडिकल-ग्रेड कॉर्सेट पहनना पड़ता है।
यानी शरीर के अंदर ही हड्डियां टूटकर नए आकार में जुड़ती हैं। सोशल मीडिया ने रिब रीमॉडलिंग के ट्रेंड को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है। एक इन्फ्लुएंसर ने बताया कि उसने इस सर्जरी पर 13 लाख से ज्यादा खर्च किए हैं।
इससे पहले भी वो कई कॉस्मेटिक सर्जरी करवा चुकी हैं। एक और इन्फ्लुएंसर का कहना है कि ये सर्जरी उन्होंने कमर का ऐसा आकार पाने के लिए करवाई, जिसे एक्सरसाइज और डाइट से हासिल करना नामुमकिन था। कमर पतली करने की ये तकनीक साल 2022 में पेरू के प्लास्टिक सर्जन डॉ. राउल मेंजानेडो सिप्रियानी ने विकसित की थी।
तब से आज कर दुनियाभर में करीब 5 हजार ऐसी सर्जरी हो चुकी हैं। हालांकि, इस सर्जरी के शरीर पर पड़ने वाले नुकसानों को लेकर अभी भी पूरी जानकारी मौजूद नहीं है। पसलियों में बदलाव के दौरान फेफड़ों के आसपास हवा भरने से न्यूमोथोरैक्स या खून जमा होने से हीमोथोरैक्स जैसी समस्याएं बो सकती हैं, जो जानलेवा भी हो सकता है।
वहीं, हड्डियों के गलत तरीके से जुड़ने, खिसकने या मनचाहा आकार न मिलने का जोखिम भी रहता है।

