राष्ट्रवाणी: अगर आपकी सैलरी भी महीने के बीच में ही खत्म हो जाती है, तो जापानी बजटिंग तरीका ‘काकेबो’ आपके लिए मददगार हो सकता है। जापानी फॉर्मूला काकेबो से हर महीने करें सेविंग्स (Picture Courtesy: Freepik) जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली।
क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि सैलरी आते ही 10-15 दिन के अंदर ही सारे पैसे खर्च हो जाते हैं? अगर हां, तो घबराइए मत आप अकेले नहीं हैं। बढ़ती महंगाई, ऑनलाइन शॉपिंग और ऑनलाइन पेमेंट के जमाने में सेविंग करना कई लोगों के लिए मुश्किल होता जा रहा है।
हालांकि, एक जपानी तरीका आपकी इस परेशानी को दूर कर सकता है। जापानी तरीका काकेबो एक ऐसा फॉर्मूला है, जिसकी मदद से आप अपने महीने के खर्च और सेविंग्स को बहुत ही अच्छी तरीके से मैनेज कर सकते हैं। काकेबो का मतलब होता है घरेलू बजट।
इसमें पेन और डायरी की मदद से महीने का बजट तैयार किया जाता है। जब आप अपने खर्चों को कागज पर लिखते हैं, तो आपके दिमाग को समझने का समय मिलता है कि आप कहां पैसे खर्च कर रहे हैं और वो जरूरी है भी या नहीं। इस लिए काकेबो फॉर्मूला से आप बेफिजूल के खर्चों से बच सकते हैं।
काकेबो फॉर्मूला बहुत आसान है। महीने की शुरुआत में या सैलेरी मिलते ही आपको बस चार सवालों का जवाब सोचना है। पहली कि आपकी महीने की आय कितनी है।
सैलेरी के साथ इनकम के दूसरे सोर्स भी जोड़कर अपनी महीने की पूरी इनकम को नोट करें। अब दूसरा सवाल पूछें कि आपके फिक्स्ड खर्चे कितने हैं? इसमें घर का किराया, बिजली का बिल, लोन, बच्चों की फीस जैसे जरूरी खर्च शामिल होंगे, जिन्हें आप टाल नहीं सकते।
खुद से तीसरा सवाल करें कि आप कितने पैसे बचाना चाहते हैं। खर्च से पहले अपनी इनकम में से एक फिक्स रकम को सेविंग्स के लिए अलग निकाल लें। चौथा सवाल करें कि बचे हुए पैसों का क्या करना है?
फिक्स्ड खर्चों और सेविंग्स को घटाने के बाद जो पैसे बचते हैं, उन्हें आप अपने रोजमर्रा के खर्च के लिए रख सकते हैं। अपने खर्चों को डायरी में नोट करते समय उन्हें चार अलग-अलग हिस्सों में बांटें। पहला हिस्सा जरूरी खर्चों का रखें, जिसमें खाना, दवाएं, घर का राशन, रोज का ट्रैवल का किराया शामिल होगा।
दूसरा हिस्सा ऑप्शनल होगा, जिसमें बाहर खाना खाना, फिल्म देखना या पार्टी करना शामिल होगा। तीसरा हिस्सा कल्चर का, जिसमें किताबें खरीदना, म्यूजियम देखना या कोई नई स्किल सीखने पर खर्च करना शामिल होगा। चौथा हिस्सा एक्स्ट्रा का होगा, जिसमें मेडिकल इमरजेंसी, घर का कोई सामान अचानक खरीदना पड़े या रिपेयर करवाना हो, उससे जुड़े खर्च शामिल होंगे।
महीने के अंत में अपनी डायरी में देखें कि आपने जो सोचा था, उसके मुताबिक आपकी सेविंग्स और खर्च हुए हैं या नहीं। अगर नहीं हुए, तो कहां परेशानी आई या अंदाजा लगाने में क्या गलती हुई इसे पहचानें। इससे आपको अगले महीने का बजट तैयार करने में मदद मिलेगी।

