राष्ट्रवाणी: धार जिले के छोटे से गांव तिवड़ी से निकलकर मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर बनने तक का दशरथ परमार का सफर बताता है कि सफलता केवल परिस्थितियों से तय नहीं होती. मेहनत, आत्मविश्वास, परिवार का साथ और सही अवसर भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं. आज दशरथ अपने परिवार के साथ खुशहाल जिंदगी जी रहे हैं और उनकी कहानी गांव के दूसरे युवाओं के लिए प्रेरणा बनी हुई है. जिन लोगों को कभी लगता था कि दिव्यांगता के कारण आगे बढ़ना मुश्किल है, उनके सामने दशरथ ने अपनी मेहनत से एक नई मिसाल पेश की है.
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