राष्ट्रवाणी: मिशेल पर्ना ने कहा, ‘जब हमने जेम्स वेब से इसे देखा तो इसके विस्तृत डेटा ने एक प्रमुख रिंग स्ट्रक्चर का खुलासा किया’. वैज्ञानिकों ने इस गैलेक्सी के आकार की जांच करने के साथ ही इसमें मौजूद गर्म गैसों की गति को भी ट्रैक किया है. इसके अलावा गैस के रासायनिक गुणों और तारों के बनने के इतिहास का भी गहराई से अध्ययन किया गया है. शांत पानी में पत्थर फेंकने की तरह कैसे पैदा हुई यह चमकदार रिंग?
गैलेक्सी का सीना चीरकर 425 किलोमीटर प्रति सेकंड से कौन भागा? इस गैलेक्सी के एक कोलिजनल रिंग होने के समर्थन में वैज्ञानिकों को कई मजबूत सुराग मिले हैं. रिसर्च टीम ने मुख्य गैलेक्सी के पास एक छोटी साथी गैलेक्सी को तेजी से दूर जाते देखा है. यह छोटी गैलेक्सी करीब 425 किलोमीटर प्रति सेकंड की तूफानी रफ्तार से बाहर की तरफ भाग रही है. इसके साथ ही वैज्ञानिकों ने दोनों गैलेक्सी को जोड़ने वाले गैस के एक पुल का भी पता लगाया है. इस गैस के पुल पर गति लगातार बदलती हुई दर्ज की गई है. गति का यह बदलाव बताता है कि दोनों गैलेक्सी के बीच बहुत गहरा संपर्क हुआ है. यह साथी गैलेक्सी मुख्य गैलेक्सी की डिस्क से ठीक उसी दिशा में स्थित है जहां सीधी टक्कर के बाद किसी घुसपैठिए गैलेक्सी को होना चाहिए. क्या नए तारों का जन्म और यह खगोलीय टक्कर एक ही समय पर हुए थे?
क्या शुरुआती ब्रह्मांड में ऐसी भयानक टक्कर आम बात थी? यह ऐतिहासिक खोज इस बात पर भी नई रोशनी डालती है कि प्राचीन काल में ऐसी टक्कर कितनी सामान्य थीं. अब तक माना जाता था कि शुरुआती ब्रह्मांड में भी ऐसी रिंग गैलेक्सी वैसी ही दुर्लभ थीं जैसी आज हैं. आज के समय में करीब 10,000 में से केवल एक गैलेक्सी में ही ऐसा दुर्लभ रिंग ढांचा पाया जाता है. अगर GS18660 के कोलिजनल रिंग होने की पुष्टि हो जाती है तो वैज्ञानिकों को अपने पुराने अनुमान बदलने होंगे. इससे यह संकेत मिलता है कि शुरुआती दौर में गैलेक्सी के बीच आमने-सामने की ऐसी टक्करें हमारी सोच से कहीं ज्यादा बार हुआ करती थीं. प्रोफेसर कॉन्सेलिस के अनुसार रोशनी के वितरण और आसपास की परिस्थितियों को देखते हुए टक्कर की यह संभावना सबसे ज्यादा सटीक बैठती है. जेम्स वेब टेलीस्कोप ने खोजी सबसे दूर मौजूद रिंग गैलेक्सी GS18660. (Video : एआई Generated) क्या किसी दूसरी गैलेक्सी की टक्कर के बिना भी बन सकती है यह रिंग?
वैज्ञानिक इस मामले में एक दूसरे पहलू पर भी सावधानी से विचार कर रहे हैं. एक वैकल्पिक थ्योरी के अनुसार यह रिंग किसी बाहरी टक्कर के बजाय गैलेक्सी की अपनी अंदरूनी बनावट से भी बन सकती है. इस गैलेक्सी के केंद्र में उत्तर से दक्षिण की ओर फैली एक डंडे जैसी संरचना भी देखी गई है जिसे स्टेलर बार कहा जाता है. इस तरह के बार केंद्र से गैस और तारों को बाहर की तरफ धकेलकर रिंग का आकार दे सकते हैं. जेम्स वेब ने शुरुआती ब्रह्मांड में पहले भी सीईईआरएस-2112 जैसी बार वाली गैलेक्सी खोजी हैं. हालांकि इतने पुराने दौर में बार की वजह से बनी रिंग का कोई पुख्ता उदाहरण अभी तक नहीं मिला है. मिशेल पर्ना का कहना है कि चाहे यह रिंग टक्कर से बनी हो या अंदरूनी बनावट से यह साबित करती है कि ब्रह्मांड के शुरुआती दिनों में ही गैलेक्सी बहुत व्यवस्थित रूप लेने लगी थीं. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

