राष्ट्रवाणी: पर्यावरण को नुकसान और स्थानीय लोगों का विरोध
पेड़ों का कटना महज एक समस्या नहीं है. जब इतने पेड़ कटते हैं तो हजारों-लाखों जंगली जानवरों को अपने ठिकाने छोड़ने पड़ते हैं, पानी की गुणवत्ता बिगड़ती है और जंगल का पूरा का पूरा इको-सिस्टम नष्ट हो जाता है. ‘नेशनल हेराल्ड’ की रिपोर्ट बताती है कि मुहोस में रहने वाले लोगों का कहना है कि पेड़ों की कटाई के बाद साइट से बहकर आ रहा भूरा पानी एक ऐसी जलधारा में मिल रहा है, जो आगे जाकर औलुजोकि नदी में मिलती है. गूगल ने कहा है कि वह साइट पर पानी की गुणवत्ता को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहा है. ओतानमाकी में स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगल साफ होने के बाद भेड़िए गांव के आसपास आने लगे हैं. पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने यह भी बताया कि जंगल में घोंसले बनाने वाले तीन पंजों वाले कठफोड़वे को अपना ठिकाना छोड़ना पड़ा है. फिनिश एसोसिएशन फॉर नेचर कंजर्वेशन के बोर्ड की अध्यक्ष हाना हालमेनपा ने इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई पर हैरानी जताई. उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कंपनी ने ऐसी व्यवस्था का फायदा उठाया, जो कंपनियों पर भरोसे के आधार पर काम करती है. उन्होंने कहा, “यह पूरी तरह अहंकार है और हैरान करने वाला है.” स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य के दौरान होने वाले शोर, इलाके के बुनियादी ढांचे पर बढ़ते दबाव और डेटा सेंटर बनने से घरेलू बिजली की कीमतों पर पड़ने वाले संभावित असर को लेकर भी चिंता जताई है. डेटा सेंटर पर सख्त नियम बनाने और पर्यावरण को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए स्थानीय समुदायों को शुल्क देने की मांग वाली एक याचिका पर 93,000 से ज्यादा लोग हस्ताक्षर कर चुके हैं. उम्मीद है कि यह विवाद फिनलैंड में अप्रैल में होने वाले अगले चुनाव का भी मुद्दा बनेगा. देश के सामने चुनौती यह है कि निवेश और रोजगार के अवसरों का फायदा उठाते हुए पर्यावरण की सुरक्षा कैसे की जाए. साथ ही, यह सवाल भी अहम है कि अंतरराष्ट्रीय कंपनियों की जरूरतों को पूरा करने वाले ऐसे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट से स्थानीय लोगों को वास्तव में कितना फायदा मिल रहा है. QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

