राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): प्रतिनिधि, रायपुर। सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में 200 से अधिक किसानों ने पारंपरिक धान की खेती छोड़ ब्लैक राइस (काले चावल) की खेती शुरू कर दी है, जिससे उन्हें प्रति एकड़ चार लाख रुपये तक की अतिरिक्त कमाई होने की उम्मीद है। 340 एकड़ क्षेत्र में ब्लैक राइस की खेती की जा रही है और कृषि विभाग अगले खरीफ सीजन में इस रकबे को एक हजार हेक्टेयर से अधिक करने की योजना बना रहा है।
पारंपरिक धान से 46,500 रुपये की तुलना में ब्लैक राइस से किसानों को 3.75 लाख से 5.25 लाख रुपये तक की कमाई का अनुमान है। पारंपरिक धान की खेती और ब्लैक राइस के उत्पादन व मिलने वाली दरों में जमीन-आसमान का अंतर है। सामान्य धान के उत्पादन पर किसानों को समर्थन मूल्य के तहत लगभग 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भुगतान मिलता है।
एक एकड़ में औसतन 15 क्विंटल धान का उत्पादन होता है, जिससे कुल 46,500 रुपये तक की आमदनी होती है। कृषि कार्य में 18 से 20 हजार रुपये खर्च होने के बाद, किसानों को प्रति एकड़ 25 से 27 हजार रुपये तक की कमाई होती है। ब्लैक राइस की खेती करने वाले किसानों ने ‘कुरो’ कंपनी के साथ अनुबंध किया है, जो गुणवत्ता के आधार पर 25,000 रुपये से 35,000 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी करेगी।
उदाहरण के लिए, एक एकड़ में जैविक पद्धति से खेती करने वाले किसान को 15 क्विंटल उत्पादन की उम्मीद है, जिसका सकल मूल्य 3.75 लाख से 5.25 लाख रुपये तक हो सकता है। 35 से 40 हजार रुपये के खर्च के बाद, किसान को प्रति एकड़ लगभग चार लाख रुपये तक अतिरिक्त कमाई हो सकती है। ड\. दीपक शर्मा (वरिष्ठ कृषि विज्ञानी) के अनुसार, “ब्लैक राइस की खेती किसानों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने के लिए कारगर साबित हो रही है।
इसमें मौजूद एंटीआक्सीडेंट, आयरन और फाइबर जैसे उच्च पोषक तत्व इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खास बनाते हैं। पारंपरिक धान की तुलना में इसकी मांग अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजारों में तेजी से बढ़ रही है। उचित मार्गदर्शन और कंपनियों के साथ अनुबंध से किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल रहा है।”

