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Home»Blog»मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया…
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया…

atulpradhanBy atulpradhanFebruary 13, 2025No Comments3 Mins Read
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मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया…
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लखनऊ: अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर के मुख्य पुजारी महंत सतेंद्र दास का बुधवार को लखनऊ के एक अस्पताल में निधन हो गया। उन्हें इस महीने की शुरूआत में मस्तिष्काघात के बाद संजय गांधी स्रातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में भर्ती कराया गया था।

अस्पताल ने बताया, ‘‘राम मंदिर अयोध्या के मुख्य पुजारी सतेंद्र दास जी ने आज अंतिम सांस ली। उन्हें तीन फरवरी को मस्तिष्काघात के बाद गंभीर हालत में न्यूरोलॉजी वार्ड के एचडीयू (हाई डिपेंडेंसी यूनिट) में भर्ती कराया गया था।’’ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 85 वर्षीय महंत सतेंद्र दास के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि यह आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘परम रामभक्त, श्री राम जन्मभूमि मंदिर, श्री अयोध्या धाम के मुख्य पुजारी आचार्य श्री सतेंद्र कुमार दास जी महाराज का निधन अत्यंत दु?खद एवं आध्यात्मिक जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। विनम्र श्रद्धांजलि।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें तथा शोक संतप्त शिष्यों एवं अनुयायियों को यह अथाह दु?ख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। ऊं शांति।’’

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा, ‘‘वह भगवान से प्रार्थना करते हैं कि महंत सतेंद्र दास के अनुयायियों को इस असहनीय पीड़ा को सहन करने की शक्ति दें।’’ दास ने 20 वर्ष की आयु में ‘संन्यास’ ले लिया था। उन्होंने छह दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दौरान भी पुजारी के रूप में सेवा की थी। बाद में जब सरकार ने परिसर को अपने नियंत्रण में ले लिया, तो उन्हें अस्थायी मंदिर का मुख्य पुजारी बना दिया गया। दास ने 2022 में ‘पीटीआई-भाषा’ से बातचीत में कहा था कि वह 1992 में अस्थायी रामलला मंदिर के पुजारी के रूप में शामिल हुए थे। उसी वर्ष बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था।

दास से जब पूछा गया कि क्या मस्जिद गिराए जाने के समय वह मौजूद थे, तो उन्होंने कहा था, ‘‘मैं वहां था। यह मेरे सामने हुआ। मैं इसका गवाह था। तीन गुंबदों में से उत्तरी और दक्षिणी गुंबदों को ‘कार सेवकों’ ने ध्वस्त कर दिया था। मैंने रामलला को उनके ंिसहासन के साथ अपने हाथ में ले लिया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘बाद में ‘कार सेवकों’ ने एक तंबू लगाया और उस स्थान को समतल कर दिया तथा शाम सात बजे तक मैंने रामलला को वहीं स्थापित कर दिया।’’

‘राम मंदिर ट्रस्ट’ के अध्यक्ष चंपत राय ने दास को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, ‘‘अयोध्या में राम मंदिर के मुख्य पुजारी आचार्य महंत सतेंद्र दास का स्वर्गवास हो गया है। वह हनुमानगढ़ी के साधु भी थे। वह विरक्त थे, बच्चों को संस्कृत, व्याकरण पढ़ाते थे। उन्होंने राम मंदिर में सेवा की। वह साकेतवासी बन गए। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे याद है कि जब दास को मुख्य पुजारी बनाया गया था तो उन्होंने केवल 100 रुपये पारिश्रमिक लिया था।’’ राम मंदिर के लिए सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले मुख्य पुजारी दास ने आध्यात्मिक जीवन का विकल्प चुना था। निर्वाणी अखाड़े से आने वाले दास अयोध्या के सबसे सुलभ संतों में से एक थे और अयोध्या एवं राम मंदिर के घटनाक्रमों के बारे में जानकारी चाहने वाले देश भर के कई मीडियाकर्मी उनसे संपर्क किया करते थे।

अयोध्या में विश्व ंिहदू परिषद (विहिप) के प्रवक्ता शरद शर्मा ने दास के निधन पर शोक व्यक्त किया।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘वह एक व्यापक रूप से सम्मानित व्यक्ति थे और उन लोगों में से थे जो अयोध्या आंदोलन के इतिहास को जानते थे। हम उनके निधन पर शोक व्यक्त करते हैं।’’

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