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Home»Blog»वक्फ अधिनियम मुस्लिम विरोधी नहीं; बंगाल की मुख्यमंत्री अपने राज्य में ‘हिंसा भड़का रहीं’: रीजीजू
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वक्फ अधिनियम मुस्लिम विरोधी नहीं; बंगाल की मुख्यमंत्री अपने राज्य में ‘हिंसा भड़का रहीं’: रीजीजू

atulpradhanBy atulpradhanApril 16, 2025No Comments5 Mins Read
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वक्फ अधिनियम मुस्लिम विरोधी नहीं; बंगाल की मुख्यमंत्री अपने राज्य में ‘हिंसा भड़का रहीं’: रीजीजू
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कोच्चि. केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने मंगलवार को कहा कि वक्फ अधिनियम में संशोधन मुस्लिम समुदाय को लक्षित कर नहीं किया गया है, बल्कि इसका उद्देश्य “अतीत की गलतियों” को सुधारना है. उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर वक्फ संशोधन अधिनियम के क्रियान्वयन का विरोध करके अपने राज्य में “हिंसा भड़काने” का आरोप लगाया. अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रीजीजू ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार का इरादा यह सुनिश्चित करना है कि भारत में किसी के लिए भी “जबरन और एकतरफा” रूप से किसी की जमीन छीनने का कोई प्रावधान न हो.

रीजीजू एर्नाकुलम जिले के मुनंबम गांव के निवासियों से मिलने के लिए केरल पहुंचे थे, जिनमें से अधिकांश ईसाई हैं और जिन्होंने वक्फ अधिनियम में संशोधन पेश करते समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार का पुरजोर समर्थन किया था. इन लोगों ने आरोप लगाया था कि वक्फ बोर्ड उनकी जमीन और संपत्ति पर अवैध रूप से दावा जता रहा है, जबकि उनके पास पंजीकृत दस्तावेज और भूमि कर भुगतान रसीदें मौजूद हैं. रीजीजू ने कहा कि वक्फ कानून में संशोधन किया गया, क्योंकि इसके कुछ प्रावधान “वक्फ बोर्ड को अभूतपूर्व शक्ति और अधिकार” देते थे.

उन्होंने कहा, “यह (संशोधन) मुस्लिम समुदाय को लक्षित करके नहीं किया गया है. इसका उद्देश्य अतीत की गलतियों को सुधारना और लोगों को इंसाफ दिलाना है.” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वक्फ बोर्ड दुनिया में सबसे ज्यादा संपत्ति रखने वालों में शामिल है, लेकिन मुस्लिम समुदाय की महिलाओं और वंचित तबके को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. उन्होंने कहा कि इस तथ्य के अलावा मुनंबम निवासियों की दुर्दशा ने केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार को वक्फ अधिनियम में संशोधन के लिए प्रेरित किया. रीजीजू ने वक्फ संशोधन अधिनियम को लेकर पश्चिम बंगाल के विभिन्न हिस्सों में भड़की हिंसा से जुड़े सवाल पर राज्य की मुख्यमंत्री को स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया.

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री यह कहकर स्पष्ट रूप से हिंसा भड़का रही हैं कि लोग वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ प्रदर्शन करें और वह संसद की ओर से पारित कानून को लागू नहीं करेंगी.” ममता के इस बयान के बारे में पूछे जाने पर कि वह पश्चिम बंगाल में संशोधित वक्फ अधिनियम लागू नहीं होने देंगी, रीजीजू ने सवाल किया कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री यह घोषणा कैसे कर सकती हैं कि वह संसद की ओर से पारित वक्फ संशोधन अधिनियम को राज्य में लागू नहीं करेंगी.

उन्होंने कहा, “कैसे? ममता कैसे कह सकती हैं कि वह इसे लागू नहीं करेंगी? वह एक संवैधानिक पद पर काबिज हैं और यह कानून एक संवैधानिक संस्था की ओर से पारित किया गया है, फिर वह कैसे कह सकती हैं कि वह किसी ऐसी चीज का पालन नहीं करेंगी, जो संवैधानिक है.” संवाददाता सम्मेलन में रीजीजू के साथ अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर भी थे.

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ने कहा कि संशोधन के बाद “किसी भूमि को मनमाने ढंग से वक्फ संपत्ति घोषित नहीं किया जा सकेगा.” उन्होंने कहा, “इस अधिनियम के लागू होने के बाद हमें शत-प्रतिशत भरोसा है और हम गारंटी देते हैं कि मुनंबम जैसे मामलों की पुनरावृत्ति नहीं होगी.” रीजीजू ने यह भी कहा कि मुनंबम के लोगों के पास अब शीर्ष अदालत का रुख करने का ही विकल्प है, क्योंकि इस मुद्दे पर केरल उच्च न्यायालय ने कुछ “अस्पष्ट टिप्पणियां” की हैं. उन्होंने कहा कि नये कानून से मुनंबम के निवासियों को उच्चतम न्यायालय के समक्ष अपने दावे प्रस्तुत करने में मदद मिलेगी.

हालांकि, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष चंद्रशेखर ने स्पष्ट किया कि संशोधित अधिनियम मुनंबम के मुद्दे को तुरंत हल करने के लिए “कोई जादू की छड़ी नहीं” है, लेकिन यह वहां के लोगों की शीर्ष अदालत में मुकदमा लड़ने में मदद करेगा. उन्होंने और रीजीजू ने दावा किया, “पहले यह संभव नहीं था.” रीजीजू ने कहा कि केंद्र सरकार संशोधित अधिनियम के कार्यान्वयन के लिए नियम बनाने की प्रक्रिया में है और जल्द ही केरल सरकार के लिए कुछ निर्देश एवं सुझाव जारी करेगी.

मंत्री ने कहा कि इनमें से एक सुझाव यह होगा कि केरल सरकार को एर्नाकुलम के जिलाधिकारी से मुनंबम क्षेत्र के सर्वेक्षण आयुक्त की ओर से किए गए सर्वेक्षण की संपूर्ण स्थिति की पुन? समीक्षा करने के लिए कहना चाहिए. उन्होंने कहा कि इससे इस मुद्दे को संशोधित अधिनियम के दायरे में लाने में भी मदद मिलेगी, क्योंकि मुनंबम के मामले का हल पहले के वक्फ प्रावधानों के तहत तलाशा जा रहा था.

मुनंबम के मुद्दे को लेकर रीजीजू की टिप्पणियों पर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. माकपा के प्रदेश सचिव विनय विश्वम ने कहा कि रीजीजू ने खुद ही भाजपा के इस दावे को साबुन के बुलबुले की तरह फोड़ दिया है कि संशोधित वक्फ अधिनियम मुनंबम निवासियों की समस्याओं का समाधान है.

विश्वम ने एक बयान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर मुनंबम के लोगों के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि गिरजाघरों के बिशप ने “जानबूझकर या अनजाने में” लोगों को गुमराह करने के प्रयासों का समर्थन किया है. संवाददाता सम्मेलन में रीजीजू ने केरल में कांग्रेस और वामपंथी दलों पर अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर मुसलमानों को “वोट बैंक” के रूप में देखने का आरोप लगाया.

उन्होंने दावा किया कि संसद में कांग्रेस और वामपंथी दलों के सदस्यों ने कहा था कि मुस्लिम ‘वोट बैंक’ ईसाइयों से बड़ा है और वे (मुसलमान) हिंदू और ईसाई समुदायों के विपरीत “एकजुट होकर” वोट करते हैं. रीजीजू ने कहा, “मैं अपने मुस्लिम भाइयों से अपील करता हूं कि वे कांग्रेस और वामपंथी दलों का ‘वोट बैंक’ न बनें. एक बार जब आप ‘वोट बैंक’ बन जाते हैं, तो आपके साथ किी वस्तु की तरह व्यवहार किया जाता है.”

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