छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार 13 मार्च 2024 को अपने कार्यकाल का चार महीने पूरे कर चुकी है। किसी भी सरकार के मूल्यांकन के नजरिए से यह समय पर्याप्त नहीं कहा जाएगा, लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार ने विगत तीन महीने में राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को पूर्ण करने के लिए जिस तरह त्वरित निर्णय लिए हैं, उसने चुनावी और सियासी वादों को भरोसे की शक्ल दे दी है। नवंबर 2023 में हुए विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में प्रचंड बहुमत अर्जित किया। अक्सर बंद कमरों में राजनीतिक गुणा-गणित लगाने वाले पॉलिटिकल पंडितों के लिए छत्तीसगढ़ का यह जनादेश भले ही हैरानी भरा रहा हो, लेकिन उसके पीछे मोदी की वह गारंटी रही, जिसके दम पर भाजपा सियासी मैदान में उतरी थी।

भाजपा ने प्रचंड बहुमत हासिल करने के बाद राज्य की कमान जिस प्रकार आदिवासी वर्ग से आने वाले विष्णुदेव साय को सौंपी, वह विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के लिए भविष्य में निवेश का सबसे बेहतरीन उदाहरण है। दरअसल, राजनीतिक दलों को जनता जनार्दन का विश्वास जीतने के लिए जनकल्याणकारी नीतियों के समानांतर ही भविष्य का नेतृत्व विकसित करना होता है। इसी क्रम में 32 प्रतिशत आदिवासी आबादी वाले राज्य को आदिवासी समाज से आने वाले चेहरे का नेतृत्व देकर भाजपा ने झारखंड, ओडिशा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र समेत देश के आदिवासी वोटबैंक को साधने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अगुआई वाली सरकार ने भी शपथ ग्रहण के अगले दिन ही पहली कैबिनेट मीटिंग में प्रधानमंत्री आवास योजना के 18 लाख नये मकान की मंजूरी देकर अपनी प्राथमिकताओं को जाहिर कर दिया। 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान की खरीदी, धान का बोनस और अंतर राशि प्रदान करने के साथ महतारी वंदन के जरिए प्रत्येक हितग्राही महिला को सालाना 12 हजार रुपये प्रदान करने जैसी जनकल्याणकारी योजनाएं लागू कर छत्तीसगढ़ ने राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को तो पूरा किया ही वह एक नया वोटबैंक भी खड़ा कर रही है। आज देशभर में भले ही छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पिछले तीन महीने में पूरी की गई मोदी की गारंटियां अधिक चर्चा में हैं,लेकिन तेंदुपत्ता संग्राहकों को 5,500 रुपये प्रति मानक बोरा संग्रहण राशि प्रदान करने के साथ नियद नेल्लानार जैसी योजनाओं से सुदूर अंचल के विकास के अनेक काम दीर्घकालिक परिणाम लेकर आएंगे। जनकल्याणकारी योजनाओं की बदौलत वोटबैंक की शक्ल में राजनीतिक पूंजी जुटाने के उपक्रम में भारतीय जनता पार्टी को महारथ हासिल हो चुकी है। प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, जनधन खाते, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, आषुष्मान भारत जैसी महात्वाकांक्षी योजनाएं आज भाजपा के विस्तार के साथ उसके वैचारिक आधार अंत्योदय को भी मजबूती प्रदान कर रही हैं। सिर्फ 90 दिन में छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस त्वरित गति से सुशासन के हर आयाम को स्पर्श किया है, उससे यह बात तो तय है कि राजनीति में अब खोखले वादों के दिन लद चुके हैं। हालांकि छत्तीसगढ़ की भाजपा सरकार के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। जनकल्याणकारी योजनाओं के साथ राज्य का वित्तीय प्रबंधन को संतुलित रखना सबसे अहम होगा।

टीम राष्ट्रवाणी

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