राष्ट्रवाणी: 60s के दौर में लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) महीनों तक रिकॉर्डिंग रूम से दूर रहीं। फिर उन्होंने एक ऐसा ‘दिल …और पढ़ें कल्ट गाने से लता मंगेशकर ने गाया था गाना 60 के दौर में लता ने लिया था महीनों तक ब्रेक एक गाने ने लता दीदी की पलट दी थी किस्मत लता मंगेशकर ने सुपरहिट गाने के लिए तोड़ा था मौन व्रत एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली।

लता मंगेशकर (Lata Mangeshkar) को ‘सुरों की रानी’, ‘स्वर कोकिला’ और ‘स्वर साम्राज्ञी’ कहकर बुलाया जाता है। उनकी आवाज में ऐसा जादू था जिसे सुनते ही हर कोई खो जाता। एक बार सिंगर और संगीतकार हेमंत कुमार ने कहा था कि जब लता मंगेशकर गाती हैं तो लगता है कि कोई महिला संत एक भक्ति गीत गा रही हो।

ऐसा कौन सा संगीतकार होगा जो लता मंगेशकर के साथ काम न करना चाहे, या ऐसा कौन सा म्यूजिक लवर होगा जो उनकी आवाज को पसंद न करे। उन्होंने 1942 में फिल्म ‘किति हसाल’ में गाना गाकर अपना करियर शुरू किया था और उसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। उनकी गायिकी देशभर में छा गई थी।

इसके बाद सिंगिंग की दुनिया में सिर्फ लता मंगेशकर के ही चर्चे होने लगे थे। मगर 60 का दशक लता मंगेशकर के लिए खास अच्छा नहीं रहा। वोकल कॉर्ड्स (गले की नसों) में कुछ समस्या होने पर वह गा नहीं पा रही थीं।

फिर मशहूर शास्त्रीय गायक उस्ताद आमिर खान की सलाह पर उन्होंने कुछ समय के लिए गायिकी से ब्रेक लिया था। लता मंगेशकर महीनों तक ब्रेक पर रहीं। उन्होंने मौन व्रत रखा था।

इस बात का खुलासा 2010 में इंदौर में एक कार्यक्रम का संचालन करने वाले संजय पटेल ने किया था। उन्होंने बताया था लता के छोटे भाई और संगीतकार-गायक हृदयनाथ मंगेशकर ने इसका जिक्र किया था। संजय पटेल ने हृदयनाथ मंगेशकर के हवाले से बताया था कि उस समय अपने करियर के पीक पर होने के बावजूद उन्होंने उस्ताद की सलाह मानी।

उस वक्त ऐसी भी चर्चा होने लगी थी कि लता मंगेशकर गायिकी से किनारा करने वाली हैं। तब हेमंत कुमार ने लता मंगेशकर का मौन व्रत तुड़वाया था। हेमंत को फिल्म ‘बीस साल बाद’ के लिए लता की आवाज चाहिए थी।

उन्होंने स्वर कोकिला को मनाया और उनसे ‘कहीं दीप जले, कहीं दिल…’ (Kahin Deep Jale, Kahin Dil…) गाना गवाया और यह इतना सुपरहिट हुआ कि फिर से लता मंगेशकर का स्वर्णिम काल शुरू हो गया था। इस गीत के लिए लता मंगेशकर को बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था। इस गीत का संगीत हेमंत कुमार ने ही तैयार किया था।

वहीं, गाने के बोल शकील बदायूं ने लिखे थे। 64 साल बाद भी यह गीत अमर है।

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