चेन्नई. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधार अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से खुला एवं पारदर्शी बनाएंगे. इससे अनुपालन बोझ में और कमी आएगी एवं छोटे व्यवसायों को लाभ होगा. तमिलनाडु स्थित सिटी यूनियन बैंक के 120वें स्थापना दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने यह बात कही. इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहीं.

सीतारमण ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने हाल ही में अगली पीढ़ी के सुधारों के लिए एक कार्यबल के गठन की घोषणा की है. इसका स्पष्ट उद्देश्य नियमों को सरल बनाना, अनुपालन लागत कम करना तथा स्टार्टअप, सूक्ष्म, लघु व मझोले उद्यमों और उद्यमियों के लिए एक अधिक अनुकूल परिवेश का निर्माण करना है.

सीतारमण ने कहा, ” इसके अतिरिक्त, अगले दो दिन होने वाली परिषद की बैठक के साथ अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों की योजनाबद्ध शुरुआत से आने वाले महीनों में अर्थव्यवस्था पूरी तरह से खुली एवं पारदर्शी हो जाएगी. अनुपालन बोझ में और कमी आएगी जिससे छोटे व्यवसायों के लिए फलने-फूलना आसान हो जाएगा.” स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने माल एवं सेवा कर (जीएसटी) में बड़े सुधारों की घोषणा की थी और नागरिकों के लिए दिवाली पर उपहारों का वादा किया था.

सीतारमण ने कहा कि देश के अपने विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण की ओर बढ़ते हुए बैंकों से न केवल ऋण का विस्तार करने बल्कि बुनियादी ढांचे के विकास को गति प्रदान करने, एमएसएमई के लिए समय पर और आवश्यकता-आधारित वित्तपोषण सुनिश्चित करने, बैंकिंग सेवाओं से वंचित लोगों को औपचारिक बैंकिंग के दायरे में लाने व विविध आवश्यकताओं को पूरा करने का आ”ान किया जाता है. इस लक्ष्य के लिए बैंकिंग क्षेत्र का समर्थन अत्यंत महत्वपूर्ण है.

उन्होंने कहा, ” इस परिवर्तन के मार्गदर्शक सिद्धांत विश्वास, प्रौद्योगिकी और पारर्दिशता होने चाहिए.” केंद्रीय वित्त मंत्री ने साथ ही कहा कि पिछले 11 वर्ष में 56 करोड़ जन-धन खाते खोले गए हैं जिनमें कुल जमा राशि 2.68 लाख करोड़ रुपये है. इनमें से अधिकतर खाताधारक महिलाएं हैं. सीतारमण ने यह भी बताया कि भारतीय अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने परिसंपत्ति गुणवत्ता में बड़ा सुधार दर्ज किया है. उन्होंने कहा कि रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने 18 वर्ष में पहली बार देश की दीर्घकालिक साख में सुधार किया है.

मंत्री ने कहा कि अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों का सकल एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां) 31 मार्च, 2025 तक घटकर 2.3 प्रतिशत रह गया है, जबकि शुद्ध एनपीए 0.5 प्रतिशत है. उन्होंने कहा, ” मैं समझती हूं कि ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में हमारे बैंकों के लिए यह एक अद्भुत उपलब्धि है. भारतीय बैंकिंग क्षेत्र के सभी सदस्यों, परिवारों, कर्मचारियों, निदेशक मंडल को उनके द्वारा की गई शानदार सेवा के लिए हमारी ओर से उचित मान्यता मिलनी चाहिए.” अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में रिकॉर्ड सुधार पर उन्होंने कहा कि इन ” प्रतिकूल दबाव परिदृश्यों” में भी बैंकों का कुल पूंजी स्तर नियामकीय न्यूनतम स्तर से ऊपर बना रहेगा.

सीतारमण ने कहा, ” इसलिए, रिकॉर्ड निम्न एनपीए वाले मजबूत और अच्छी तरह से पूंजीकृत बैंकों का अर्थ परिवारों, एमएसएमई और बुनियादी ढांचे के लिए सस्ता एवं स्थिर ऋण, कम प्रणालीगत जोखिम तथा भारत की वित्तीय प्रणाली में निरंतर विश्वास है.” वित्तीय क्षेत्र के कुछ बुनियादी पहलुओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अप्रैल-जून, 2025 तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो सभी अनुमानों से अधिक है और विभिन्न क्षेत्रों में समग्र रूप से अच्छी गति दर्शाती है.

उन्होंने कहा कि मुद्रास्फीति दर लगातार नौ महीनों से ”गिरावट” दर्ज कर रही है और जुलाई, 2025 में आठ साल के निचले स्तर 1.55 प्रतिशत आ जाएगी. सीतारमण ने कहा कि जून, 2025 तक कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में लगभग 22 लाख सदस्यों की शुद्ध वृद्धि हुई है, जो लगातार दूसरे महीने रिकॉर्ड वृद्धि का संकेत है. भारतीय प्रबंध संस्थान (बेंगलुरु) द्वारा किए गए अध्ययन का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जन-धन योजना खातों ने वित्तीय बचत को सुरक्षित रखने में मदद की है और विशेष रूप से कोविड-19 वैश्विक महामारी के समय में ये बहुत मददगार साबित हुए हैं. उन्होंने कहा, ” बैंक खाता केवल एक पासबुक नहीं है. यह अवसरों का ‘पासपोर्ट’ है जो ऋण, बचत, बीमा एवं सम्मान तक पहुंच को संभव बनाता है. ”

राष्ट्रवाणी एक डिजिटल समाचार एवं जनचर्चा मंच है, जिसका उद्देश्य विश्वसनीय पत्रकारिता, सार्थक राष्ट्रीय विमर्श और जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रभावशाली तरीके से समाज के सामने प्रस्तुत करना है।

हम मानते हैं कि पत्रकारिता केवल समाचार देने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने, लोकतांत्रिक संवाद को मजबूत बनाने और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सकारात्मक सोच विकसित करने का दायित्व भी है। “राष्ट्र प्रथम” की भावना के साथ राष्ट्रवाणी देश, समाज, शासन, अर्थव्यवस्था, कृषि, तकनीक, संस्कृति और जनसरोकारों से जुड़े विषयों को गहराई और तथ्यात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करता है।

संपादक : नीरज दीवान

मोबाइल नंबर : 7024799009

© 2026 ThemeSphere. Designed by ThemeSphere.
Exit mobile version