वाशिंगटन/मास्को. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका जानता है कि ईरान के शीर्ष नेता अयातुल्ला अली खामेनेई कहां छिपे हैं, लेकिन वह फिलहाल उन्हें मारना नहीं चाहता. ट्रंप ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने का आग्रह किया. उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब इजराइल और ईरान के बीच पांच दिन से जारी संघर्ष लगातार बढ़ता जा रहा है.

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों ने कहा: ईरान नहीं बना रहा है परमाणु हथियार, ट्रंप ने आकलन खारिज किया

तुलसी गबार्ड ने इस वर्ष की शुरुआत में ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में कांग्रेस (अमेरिकी संसद) के समक्ष गवाही देते समय कोई संदेह नहीं छोड़ा था. राष्ट्रीय खुफिया निदेशक गबार्ड ने सांसदों को बताया कि देश (ईरान) परमाणु हथियार नहीं बना रहा है तथा इसके सर्वोच्च नेता ने स्थगित किये जा चुके कार्यक्रम को पुन? मंजूरी नहीं दी है.

लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन वापस आते समय उड़ान के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के आकलन को खारिज कर दिया. ट्रंप ने इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष पर ध्यान केंद्रित करने के लिए ‘ग्रुप ऑफ सेवन (जी 7)’ शिखर सम्मेलन के अपने दौरे में कटौती की है. ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ”मुझे परवाह नहीं है कि उन्होंने क्या कहा.” अमेरिकी राष्ट्रपति का मानना है कि ईरान परमाणु बम बनाने के ‘बहुत करीब’ है.

ट्रंप के बयान ने उन्हें अपने स्वयं के शीर्ष खुफिया सलाहकार के बजाय इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ खड़ा कर दिया है, जिन्होंने परमाणु हथियार संपन्न ईरान को एक आसन्न खतरा बताया है. रिपब्लिकन राष्ट्रपति के मंगलवार को ‘सिचुएशन रूम’ में राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों के साथ बैठक करने की उम्मीद थी, जिसमें वह अगले कदमों की योजना बनाएंगे. गबार्ड के बयान का ट्रंप द्वारा खंडन करना, उनके पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के शीर्ष अफसरों से हुए टकरावों की याद दिलाता है जब उन्होंने (ट्ंरप ने) उन्हें ‘डीप स्टेट’ के हिस्से के तौर पर देखा जो उनके एजेंडे को कमजोर कर रहा था.

उल्लेखनीय बात यह है कि 2018 में जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या मास्को ने 2016 के चुनाव में हस्तक्षेप किया था, तो उन्होंने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का पक्ष लिया और कहा कि पुतिन ने ”बहुत सशक्त और प्रभावशाली ढंग से इससे इनकार किया है.” ईरान पर यह नवीनतम खबर इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि ट्रंप ने अपने दूसरे प्रशासन में स्थापित हस्तियों के बजाय वफादारों को शामिल किया है. सैन्य दिग्गज और हवाई से डेमोक्रेटिक कांग्रेस की पूर्व सदस्य गबार्ड को रिपब्लिकन नियंत्रित सीनेट ने बहुत कम अंतर से मंजूरी दी थी क्योंकि खुफिया जानकारी या विशाल संगठनों के प्रबंधन का उनका अनुभव बहुत कम था.

वर्ष 2022 में डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़कर ट्रंप का समर्थन करने वाली गबार्ड को मंगलवार को कैपिटल हिल में बंद कमरे में सीआईए निदेशक जॉन रैटक्लिफ के साथ पहले से तय बजट सुनवाई के दौरान गवाही देने की उम्मीद है. दोनों अधिकारियों से ईरान और ट्रंप के हालिया बयानों पर उनके विचारों के बारे में सवाल पूछे जाने की संभावना है.

ईरान के साथ सैन्य संघर्ष के समाधान के लिये किसी मध्यस्थता के लिये तैयार नहीं है इजराइल : क्रेमलिन
ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के बीच रूसी राष्ट्रपति के एक सहयोगी ने मंगलवार को कहा कि इजराइल ईरान के साथ संघर्ष को शांति के रास्ते पर लाने के लिए किसी मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने प्रेसवार्ता में कहा, ”फिलहाल, हम इजराइल की ओर से किसी भी तरह की मध्यस्थता में शामिल होने या शांति के मार्ग पर चलने में अनिच्छा देख रहे हैं. हमने यही देखा है.” वह इस प्रश्न का उत्तर दे रहे थे कि क्या ईरान-इजराइल सैन्य संघर्ष के समाधान में मध्यस्थता करने की रूसी राष्ट्रपति की तत्परता पर कोई प्रतिक्रिया हुई है.

पेस्कोव ने कहा कि रूस को नहीं लगता कि इजराइल ईरान के साथ संघर्ष को सुलझाने के लिए किसी मध्यस्थ की मदद लेगा और ‘सामान्य तौर पर शांति की राह पर आगे बढ़ेगा.’ उन्होंने कहा, ”आप सभी जानते हैं कि रूसी पक्ष और विशेष रूप से राष्ट्रपति पुतिन ने कहा है कि यदि आवश्यक हुआ तो रूस ऐसी मध्यस्थता सेवाएं प्रदान करने के लिए तैयार है.” इस बीच, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अपने इंडोनेशियाई समकक्ष सुगियोनो के साथ वार्ता के दौरान इस बात पर जोर दिया कि दुनिया को इजराइल और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष को कम करने तथा कूटनीतिक समाधान खोजने के लिए कोई कसर नहीं छोड़नी चाहिए.

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