नयी दिल्ली. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत, अमेरिका के साथ कृषि बाजार पहुंच को लेकर चल रही व्यापार वार्ता में संभावित लाभ और हानि का आकलन करते हुए अपने किसानों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देगा. चौहान ने पीटीआई-भाषा को दिए साक्षात्कार में कहा, “हमारी प्राथमिकता अपने किसानों के हितों की रक्षा करना है. भारत आंखें मूंदकर काम नहीं करेगा. हम अपने लाभ और हानि का आकलन करेंगे. इसे ध्यान में रखते हुए समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा.” वे एक सवाल का जवाब दे रहे थे कि अमेरिकी कृषि और बागवानी उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच के लिए दबाव के बीच भारत किसानों की सुरक्षा कैसे करेगा.

वार्ताकार द्विपक्षीय सौदे के पहले चरण की व्यापक रूपरेखा के लिए खाके पर सहमत हो सकते हैं, जिस पर 2025 की शरद ऋतु (सितंबर-अक्टूबर) तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. मंत्री ने कहा, “भारत और अमेरिका के बीच चर्चा चल रही है. एक बात स्पष्ट है, हम अपने किसानों के हितों की रक्षा करेंगे. जब हम दो देशों के बारे में बात करते हैं, तो हमें समग्र व्यापार को देखने की जरूरत होती है.” नीति आयोग की रिपोर्ट ‘नई अमेरिकी व्यापार व्यवस्था के तहत भारत-अमेरिका कृषि व्यापार को बढ़ावा देना’ के अनुसार, 2024 में समाप्त होने वाली त्रैवार्षिक अवधि में भारत को अमेरिकी कृषि और संबद्ध उत्पाद निर्यात का मूल्य लगभग 2.22 अरब डॉलर था. इसी अवधि में, भारत ने अमेरिका को 5.75 अरब डॉलर मूल्य के कृषि उत्पादों का निर्यात किया.

अमेरिका को भारत के मुख्य कृषि निर्यात में जमे हुए झींगा, बासमती चावल, मसाले, प्रसंस्कृत अनाज और अन्य मूल्यर्विधत उत्पाद शामिल हैं. अमेरिका मक्का, सोयाबीन और पशु आहार जैसे अधिक कृषि उत्पादों का निर्यात करना चाहता है, लेकिन उसे भारत से, विशेष रूप से कृषि में उच्च शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जहां औसत शुल्क 39-50 प्रतिशत तक पहुंच सकता है.

मंत्री की टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब भारत और अमेरिका कृषि व्यापार के विस्तार पर बातचीत जारी रखे हुए हैं, जिसमें वाशिंगटन भारतीय बाजार में अपने कृषि उत्पादों के लिए कम शुल्क और बेहतर बाजार पहुंच की मांग कर रहा है. भारत, ग्रामीण समुदायों से संभावित प्रतिक्रिया की चिंता और घरेलू उत्पादकों को वैश्विक मूल्य अस्थिरता से बचाने की आवश्यकता के कारण अपने कृषि और डेयरी बाजारों को पूरी तरह से खोलने के प्रति सतर्क है.

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