राष्ट्रवाणी: राजनांदगांव। जनपद पंचायत राजनांदगांव में एसडीओ सहित दो इंजीनियरों के तबादले को लेकर विवाद गहराया हुआ है। कहा जा रहा है कि जनपद के प्रमुख पदों पर बैठे सत्ता से जुड़े कुछ नेताओं ने कथित कमीशनखोरी को लेकर तबादला करा दिया है, वहीं जनपद का दूसरा खेमा भी दबाव बनाकर अधिकारियों को रिलीव करने से रोक दिया है।
कुल मिलाकर भाजपा के भीतर ही जनपद में लड़ाई अब आमने सामने हो गई है। जनपद पंचायत राजनांदगांव इन दिनों काफी विवादों में चल रहा है। जहां एक तरफ तीन इंजीनियरों का तबादला मुद्दा बना हुआ है वही दूसरी तरफ कमीशन खोरी को लेकर विवाद गहराया हुआ है।
जानकारी के अनुसार पंचायतों को पानी टैंकरों की सप्लाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करीब 80 टैंकरों की खरीदी में कथित तौर पर भारी अंतर सामने आने के बाद कमीशनखोरी के आरोप लगाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि जिन टैंकरों की बाजार कीमत लगभग डेढ़ लाख रुपए के आसपास बताई जा रही है, उनकी खरीदी पंचायतों के माध्यम से करीब तीन लाख रुपए तक में किए जाने के आरोप हैं।
मामले में पंचायतों द्वारा भुगतान के लिए चेक काटे जाने की बात भी सामने आई है। टैंकरों की सप्लाई को लेकर किए गए भौतिक सत्यापन में भी कुछ ऐसी अनियमितताएं सामने आने का दावा किया जा रहा है, जिसके बाद पूरी खरीदी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है। आरोप है कि जांच के नाम पर केवल औपचारिकता पूरी की जा रही है और जिम्मेदारों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
जनपद पंचायत क्षेत्र में जेम ( पोर्टल के माध्यम से की जा रही खरीदी को लेकर भी शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि अलग-अलग पंचायतों में टैंकरों सहित अन्य सामग्री की सप्लाई के लिए दुर्ग-भिलाई से लेकर राजनांदगांव तक के सप्लायर सक्रिय हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सप्लाई प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर मिलीभगत के कारण सप्लायरों को लाभ पहुंचाया जा रहा है।
जनपद पंचायत में हाईमास्ट सहित अन्य खरीदी में भी करोड़ों रुपए की अनियमितता के आरोप लगाए जाते रहे हैं। इन मामलों में भी प्रभावी जांच और जिम्मेदारी तय नहीं होने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है। जनपद पंचायत में पदस्थ एसडीओ सहित दो इंजीनियरों के तबादले की प्रक्रिया भी चर्चा में है।
अधिकारियों से कमीशन मांगने को लेकर आरोप लगाए जाने के बाद तबादले की बात सामने आई थी, लेकिन फिलहाल यह कार्रवाई रोक दी गई है। बताया जा रहा है कि जनपद के एक प्रमुख पदाधिकारी के खिलाफ सदस्यों ने मोर्चा खोलते हुए विधानसभा अध्यक्ष से शिकायत की थी। इसके बाद तबादले पर रोक लगाए जाने की बात कही जा रही है।
टैंकर खरीदी, जेम पोर्टल से होने वाली सप्लाई, हाईमास्ट सहित अन्य निर्माण एवं खरीदी कार्य लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग उठ रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि केवल कागजी जांच के बजाय प्रत्येक पंचायत में पहुंचकर सामग्री का भौतिक सत्यापन, भुगतान की जांच, जेम पोर्टल के टेंडर एवं सप्लायरों के दस्तावेजों की जांच की जाए।
साथ ही संबंधित अधिकारियों और पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जाए। यदि आरोपों की स्वतंत्र जांच होती है तो टैंकरों की वास्तविक खरीद कीमत, पंचायतों द्वारा किए गए भुगतान और सप्लायरों को हुए भुगतान के बीच का अंतर स्पष्ट हो सकता हैं।

