काठमांडू: रैपर से नेता बने बालेंद्र शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (आरएसपी) नेपाल में ‘जेन जेड’ के ंिहसक विरोध प्रदर्शनों के बाद हुए पहले आम चुनाव में शनिवार को भारी जीत की ओर अग्रसर है। राजनीतिक रूप से अस्थिर राष्ट्र में स्थापित राजनीतिक दलों के प्रभुत्व को ध्वस्त करते हुए आरएसपी के इस चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने की संभावना है।

नेपाल के निर्वाचन आयोग के अपराह्न 12:30 बजे के आंकड़ों के अनुसार, बृहस्पतिवार को हुए चुनाव में आरएसपी ने काठमांडू जिले के सभी 10 निर्वाचन क्षेत्रों में सूपड़ा साफ करते हुए 34 सीट पर जीत दर्ज की है और अन्य 86 सीट पर आगे है। नेपाली कांग्रेस ने छह सीट पर जीत हासिल की है और अन्य 10 सीट पर आगे है। नेपाली कम्युनिस्ट पार्टी ने दो सीट जीती हैं और अन्य आठ पर आगे है।

प्रधानमंत्री पद से हटाए गए के पी शर्मा ओली की कम्युनिस्ट पार्टी आॅफ नेपाल (एकीकृत मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने एक सीट जीती है और आठ सीट पर आगे है। श्रम संस्कृति पार्टी चार सीट पर आगे है जबकि राष्ट्रीय प्रजापति पार्टी एक सीट पर आगे है। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत हासिल की है।

आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने चितवन-2 निर्वाचन क्षेत्र से भारी अंतर से जीत हासिल की जो उनकी लगातार तीसरी जीत है। पूर्व गृह मंत्री ने 54,402 वोट हासिल किए जबकि उनकी निकटतम प्रतिद्वंद्वी नेपाली कांग्रेस की मीना कुमारी खरेल को 14,564 वोट मिले। काठमांडू के महापौर रहे बालेंद्र शाह ने झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र में चार बार के प्रधानमंत्री और सीपीएन-यूएमएल अध्यक्ष के पी शर्मा ओली के गढ़ में अब तक 42,532 वोट हासिल किए हैं। ओली को अब तक 11,427 वोट मिले हैं।

‘बालेन’ के नाम से जाने जाने वाले 35 वर्षीय इंजीनियर के नेपाल का अगला प्रधानमंत्री बनने की संभावना है, जो स्थापित दलों के प्रति जनता की अस्वीकृति को दर्शाता है। नेपाल में पिछले 18 वर्षों में 14 सरकार बन चुकी हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार, पुष्प कमल दाहाल प्रचंड रुकुम पूर्व में जीत गए हैं। उन्होंने 10,240 वोट हासिल किए, जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंदी सीपीएन (यूएमएल) के लीलामणि गौतम को 3,462 वोट मिले।

भारत इस चुनाव पर करीब से नजर रख रहा है। वह राजनीतिक रूप से अस्थिर हिमालयी देश में एक स्थिर सरकार की उम्मीद कर रहा है ताकि दोनों पक्षों के बीच विकासात्मक साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बृहस्पतिवार को दिल्ली में कहा, ”हम पारस्परिक लाभ के लिए अपने दोनों देशों और लोगों के बीच मजबूत बहुआयामी संबंधों को और आगे बढ़ाने के लिए नेपाल की नयी सरकार के साथ काम करने को लेकर उत्सुक हैं।”

उन्होंने कहा कि भारत ने ”नेपाल में शांति, प्रगति और स्थिरता का लगातार समर्थन किया है और अपनी प्रतिबद्धता के अनुरूप, इन चुनावों के लिए नेपाल सरकार के अनुरोध पर साजोसामान संबंधी आपूर्ति प्रदान की है”। संसद के कुल 275 सदस्यों में से 165 सदस्यों का चुनाव प्रत्यक्ष मतदान प्रणाली के माध्यम से होगा, जबकि शेष 110 सदस्यों को आनुपातिक विधि से चुना जाएगा।

नेपाल में हुए इस आम चुनाव में लगभग 1.89 करोड़ मतदाता प्रतिनिधि सभा के 275 सदस्यों को चुनने के पात्र थे जिनमें से लगभग 60 प्रतिशत मतदाताओं ने बृहस्पतिवार को मतदान किया। प्रत्यक्ष मतदान के तहत 165 सीट के लिए लगभग 3,400 उम्मीदवार और आनुपातिक मतदान के माध्यम से 110 सीट के लिए 3,135 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं।

पिछले साल आठ और नौ सितंबर को दो दिन तक जारी रहे ‘जेन जेड’ के ंिहसक विरोध प्रदर्शनों के बाद प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली को सत्ता से हटना पड़ा था। ओली नेपाली कांग्रेस के समर्थन से बनी गठबंधन सरकार का नेतृत्व कर रहे थे, जिसे लगभग दो-तिहाई बहुमत प्राप्त था।
‘जेन जेड’ पीढ़ी से तात्पर्य 1997 से 2012 के बीच पैदा हुए लोगों से है। ‘बालेन’ को अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए एक लोकप्रिय विकल्प माना गया। यह स्थिति तब बनी जब ‘जेन जेड’ के युवाओं ने सोशल मीडिया पर लगाए गए प्रतिबंध एवं भ्रष्टाचार के खिलाफ पिछले साल सितंबर में दो दिन तक देशव्यापी ंिहसक प्रदर्शनों के बाद ओली के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार को सत्ता से हटा दिया।

‘बालेन’ ने तब अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने से इनकार कर दिया था और कहा था कि वह संसदीय चुनाव लड़कर पूर्ण कार्यकाल के लिए सरकार का नेतृत्व करना पसंद करेंगे। जनवरी 2022 में वह रवि लामिछाने के नेतृत्व वाली आरएसपी में शामिल हो गए और जल्द पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार घोषित कर दिए गए। प्रचार अभियान के दौरान आरएसपी को व्यापक समर्थन मिला।

नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष गगन थापा अपनी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार हैं जबकि सीपीएन (यूएमएल) ने ओली को प्रधानमंत्री पद के लिए अपना चेहरा बनाया है। नेपाली कांग्रेस और सीपीएन (यूएमएल) दोनों ही उस सरकार का हिस्सा थे जिसे पिछले साल ‘जेन जेड’ के प्रदर्शन के बाद सत्ता से हटना पड़ा था। ओली के सत्ता से हटने के बाद राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने 12 सितंबर को प्रतिनिधि सभा को भंग कर दिया और सुशीला कार्की को कार्यवाहक प्रधानमंत्री नियुक्त किया।



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