BCCI: पूर्व भारतीय कप्तान और मुख्य चयनकर्ता कृष्णमाचारी श्रीकांत ने कहा है कि टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने वाले विराट कोहली, रोहित शर्मा और चेतेश्वर पुजारा सम्मानजनक विदाई के हकदार थे। श्रीकांत ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की आलोचना करते हुए कहा कि वह कोहली और रोहित के साथ टेस्ट क्रिकेट से उनके संन्यास लिए जाने के बारे में ठीक से बात नहीं कर पाई।

पुजारा ने हाल ही में क्रिकेट को कहा अलविदा
रोहित और कोहली के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद हाल ही में पुजारा ने क्रिकेट के सभी प्रारूपों को अलविदा कह दिया था। पुजारा को हाल ही में संपन्न हुए इंग्लैंड दौरे के लिए भारतीय टेस्ट टीम में नहीं चुना गया था। पुजारा ने भारत के लिए अपना आखिरी मैच 2023 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) के फाइनल में खेला था। पुजारा इसके बाद घरेलू क्रिकेट में खेलते रहे, लेकिन उन्होंने 2025-26 सीजन से ठीक पहले उन्होंने खेल को अलविदा कह दिया।

श्रीकांत ने अपने यू-ट्यूब चैनल पर कहा, अगर आप अपने देश के लिए 100 टेस्ट खेलते हैं तो आप एक बेहतरीन क्रिकेटर जरूर होंगे। इसलिए आपको एक शानदार विदाई मिलनी चाहिए। मुझे पूरा यकीन है कि विराट कोहली और रोहित शर्मा के संन्यास के समय संवादहीनता बहुत ज्यादा थी। उन्हें उनसे बात करनी चाहिए थी, लेकिन इसके बजाय यह खेल और भारतीय क्रिकेट के लिए अच्छा नहीं है।

श्रीकांत बोले- कोहली में दो साल का टेस्ट क्रिकेट शेष था
बीसीसीआई के मुख्य चयनकर्ता रह चुके श्रीकांत ने जोर देकर कहा कि कोहली में अभी कम से कम दो साल का टेस्ट क्रिकेट बाकी था और वह एक उचित विदाई के हकदार थे। श्रीकांत ने कहा, विराट कोहली का संन्यास ऐसे ही हुआ। कोहली एक बेहतर विदाई के हकदार थे। उनके पास अभी दो साल का टेस्ट क्रिकेट बाकी था। लेकिन इंग्लैंड में सीरीज ड्रॉ होने के कारण, उनके बारे में ऐसी बातें बंद हो गईं। हालांकि, भारत को कुछ समय तक विराट कोहली जैसा क्रिकेटर मिलना मुश्किल होगा।

श्रीकांत ने इस बात पर भी विचार व्यक्त किया कि किस तरह पुजारा ने विदाई टेस्ट मैच खेले बिना ही संन्यास ले लिया। श्रीकांत ने कहा, पुजारा के साथ भी ऐसा ही है, हालांकि उन्हें भारत के लिए खेले हुए काफी समय हो गया है, लेकिन बीसीसीआई को उनके भी संन्यास की योजनाओं के बारे में बात करनी चाहिए थी। बेशक, खिलाड़ी को भी सहयोग करना होगा और यह समझना होगा कि उनका समय कब पूरा हो गया है। अगर ऐसा होता तो पुजारा को बेहतर विदाई मिलती। लेकिन यह खिलाड़ी, चयनकर्ताओं और बीसीसीआई के बीच सहयोग का मामला है।

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