राष्ट्रवाणी: आर्थिक गलियारा एक एकीकृत नेटवर्क है जो आर्थिक केंद्रों को जोड़ता है। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) दुनिया का सबसे …और पढ़ें दुनिया का सबसे बड़ा आर्थिक गलियारा (एआई फोटो) आर्थिक गलियारा व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देता है इमेक दुनिया का सबसे बड़ा प्रस्तावित आर्थिक गलियारा है इमेक भारत के निर्यात बढ़ाएगा, चीन के बरि का जवाब देगा बिजनेस डेस्क, नई दिल्ली। आपने अकसर एक शब्द सुना होगा – इकोनॉमिक कोरिडोर, जिसे हिंदी में आर्थिक गलियारा कहते हैं। मगर क्या आप इसका मतलब जानते हैं? इकोनॉमिक कॉरिडोर, किसी खास भौगोलिक इलाके में ट्रांसपोर्ट, एनर्जी और टेलीकम्युनिकेशन इंफ्रास्ट्रक्चर का एक इंटीग्रेटेड नेटवर्क होता है। इसे इकोनॉमिक सेंटर्स को जोड़ने और व्यापार, निवेश और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देने के लिए बनाया जाता है। आम हाईवे या रेलवे प्रोजेक्ट के उलट, जो बस एक जगह (पॉइंट A) को दूसरी जगह (पॉइंट B) से जोड़ते हैं, इकोनॉमिक कॉरिडोर प्रोडक्शन हब, मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर, शहरी केंद्रों और इंटरनेशनल गेटवे को आपस में जोड़ते हैं।यह कॉन्सेप्ट 1998 में एशियन डेवलपमेंट बैंक (ADB) ने दिया था। इसका मकसद सिर्फ बेसिक ट्रांसपोर्ट से आगे बढ़कर, किसी इलाके में आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और गरीबी कम करने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाना था। भारत-मध्य पूर्व-यूरोप इकोनॉमिक कोरिडोर (IMEC, या IMEEC) एक प्रस्तावित मल्टी-नेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर इनिशिएटिव है, जिसका मकसद इंटीग्रेटेड ट्रेड, ऊर्जा और डिजिटल नेटवर्क के माध्यम से इन तीनों क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाना है। तैयार होने पर यही दुनिया का सबसे बड़ा इकोनॉमिक कोरिडोर होगा।2 साल पहले सितंबर 2023 में नई दिल्ली में हुए G20 शिखर सम्मेलन में घोषित इमेक को आंशिक रूप से चीन के अंतरराष्ट्रीय इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट, ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (BRI) के जवाब के तौर पर देखा जा रहा है। इस मल्टीनेशनल इनिशिएटिव के दो मुख्य हिस्से हैं : एक ईस्टर्न कॉरिडोर जो भारत को पर्शियन गल्फ से जोड़ता है और दूसरा नॉर्दर्न कॉरिडोर जो गल्फ को लेवांट और मेडिटेरेनियन के रास्ते यूरोप से जोड़ता है। इसके मल्टीमॉडल इंफ्रास्ट्रक्चर में रेलवे, गहरे पानी वाले समुद्री बंदरगाह, बिजली ग्रिड और हाई-स्पीड डेटा केबल शामिल हैं।पारंपरिक रास्तों के मुकाबले इससे शिपिंग की लागत में अरबों की कमी आ सकती है और शिपिंग का समय 40% तक कम हो सकता है। हालांकि, अभी क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण यह कॉरिडोर अपने मूल रूप में असल में रुका हुआ है। इमेक को एक मजबूत सप्लाई चेन नेटवर्क बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जो दक्षिण एशिया (खासकर भारत), मध्य पूर्व और यूरोप को जोड़ेगा। इसका मकसद बाब अल-मंदेब और स्वेज नहर से गुजरे बिना सामान, ऊर्जा और डेटा का ट्रांसपोर्ट करना है।इस कॉरिडोर के इंफ्रास्ट्रक्चर में बेहतर पोर्ट, इंटीग्रेटेड ग्रिड, रेल लिंक और सब-सी केबल शामिल होंगे। इससे व्यापार, ऊर्जा और डेटा के लिए एक ज़्यादा कुशल वैकल्पिक रास्ता बनेगा, जो इस क्षेत्र में अमेरिका के लंबे समय के हितों को आगे बढ़ाएगा। इस इकोनॉमिक कोरिडोर के समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले मुख्य देशों और संगठनों में भारत, अमेरिका, UAE, सऊदी अरब, इज़राइल, जॉर्डन, फ़्रांस, जर्मनी, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं। वहीं दूसरी तरफ कतर, ओमान, तुर्की, इराक और ईरान इसमें शामिल नहीं हैं। अपने मजबूत इंडस्ट्रियल बेस की वजह से, इमेक से भारत को सबसे ज्यादा फायदा होने की उम्मीद है। भारत ने इसमें काफी राजनीतिक दिलचस्पी दिखाई है, क्योंकि वह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का मुक़ाबला करना चाहता है।साथ ही, इसमें भारत की आर्थिक दिलचस्पी भी है। अनुमान बताते हैं कि इमेक से अकेले भारत के एक्सपोर्ट में $22.09 बिलियन (कुल सामान के एक्सपोर्ट का 5%) की बढ़ोतरी हो सकती है।

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