राष्ट्रवाणी (रायपुर ब्यूरो): सतीश पांडेय, , रायपुर। कभी माओवादी हिंसा से प्रभावित रहे बस्तर संभाग में अब तस्वीर बदल रही है। पुनर्वास, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के जरिए युवाओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास तेज हुए हैं।
अब तक 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से 2,323 को रोजगारोन्मुखी व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया गया है। वहीं, नियद नेल्ला नार योजना 2.0 के तहत 10 जिलों में 1,11,165 युवाओं को प्रशिक्षण मिला है और 50,053 को रोजगार दिया गया है। सरकार का लक्ष्य आत्मसमर्पित माओवादियों और प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक आजीविका देकर आत्मनिर्भर बनाना है।
बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद में युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टालर, वाहन मरम्मत तकनीशियन और सिलाई मशीन आपरेटर जैसे कामों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। नियद नेल्ला नार योजना के तहत आत्मसमर्पित माओवादियों में 1,267 युवाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि 461 प्रशिक्षणरत हैं।
माओवादी हिंसा से प्रभावित 779 हितग्राही प्रशिक्षित हो चुके हैं और 191 प्रशिक्षण ले रहे हैं। बीजापुर में प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री और सिलाई के काम से जोड़ा गया है। बस्तर में युवाओं को पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड, कृषि और श्रम कार्यों में अवसर मिले हैं।
बस्तर संभाग के आठ पुनर्वास केंद्रों में से छह – बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर – को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता के रूप में पंजीकृत किया गया है। दस्तावेजों के अभाव में पात्र युवा प्रशिक्षण से वंचित न हों, इसके लिए पंजीयन के समय आधार कार्ड की अनिवार्यता में छूट दी गई है।
दुर्गम क्षेत्रों तक प्रशिक्षण पहुंचाने के लिए प्रत्येक विकासखंड में स्किल डेवलपमेंट सेंटर स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है। बीजापुर में असिस्टेंट मेसन पाठ्यक्रम के तहत 30 युवाओं का प्रशिक्षण शुरू हुआ है। प्रभावित क्षेत्रों में आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए 780 लाख रुपये का प्रविधान किया गया है।
सरकार का कहना है कि ये प्रयास रोजगार के साथ क्षेत्र में विश्वास और स्थायी शांति का माहौल बनाने में मददगार होंगे। राज्य गठन के बाद से बस्तर में माओवादियों की सैन्य ताकत खत्म होने का दावा किया जा रहा है। बस्तर पुलिस के अनुसार, बीते एक साल में 600 से अधिक हथियार जब्त किए गए हैं।
इनमें एके-47, इंसास, एसएलआर और एलएमजी जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं। राज्य गठन के बाद से सुरक्षा बल माओवादियों के पास से 3,500 से अधिक हथियार बरामद कर चुके हैं। बस्तर आईजी बद्रीनारायण मीणा के अनुसार, सुरक्षा बलों की रणनीति केवल मुठभेड़ों तक सीमित नहीं थी।
माओवादियों की सैन्य क्षमता और हथियारों के नेटवर्क को खत्म करना भी अभियान का प्रमुख हिस्सा रहा। बीजीएल लांचर जैसे भारी हथियार भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग माओवादी बड़े हमलों में करते थे।

