लखनपुर के केवरी गांव में नशे के खिलाफ अनूठी मुहिम, पंचायत ने तय की जुर्माने की राशि

राष्ट्रवाणी, 31 अगस्त 2026। सरगुजा जिले के लखनपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत केवरी में नशे के खिलाफ ग्रामीणों ने अनूठी पहल शुरू की है। पंचायत ने गांव को नशामुक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1 सितंबर से शराब पीने, पिलाने, बनाने और शराब के नशे में गांव में आने पर जुर्माना लगाने का निर्णय लिया है। पंचायत के इस फैसले को लेकर ग्रामीणों को जागरूक करने रैली निकाली जा रही है और घर-घर जाकर समझाइश दी जा रही है।

ग्राम पंचायत के जनप्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं, युवा और ग्रामीण इस मुहिम में शामिल हो रहे हैं। ग्राम सुधार समिति के नेतृत्व में चलाए जा रहे अभियान के दौरान ग्रामीणों को शराब और अन्य नशे से होने वाले नुकसान के बारे में बताया जा रहा है। ग्रामीणों से नशे से दूर रहने और गांव को नशामुक्त बनाने में सहयोग की अपील की जा रही है।

शराब पीने पर 5 हजार, पीकर आने पर 3 हजार जुर्माना

ग्राम सभा में प्रस्ताव पारित कर नशे के खिलाफ सख्ती का निर्णय लिया गया है। पंचायत द्वारा जारी सूचना के अनुसार शराब पीने पर 5 हजार रुपये, शराब पिलाने और बनाने पर 5 हजार रुपये तथा शराब पीकर गांव में आने पर 3 हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित किया गया है।

पंचायत के इस निर्णय की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने के लिए सूचना पत्र के साथ-साथ जनजागरूकता रैली भी निकाली जा रही है। अभियान के दौरान ग्रामीणों द्वारा इस पहल का स्वागत भी किया जा रहा है। कई स्थानों पर लोगों ने मुहिम में शामिल लोगों का फूल-माला पहनाकर अभिनंदन किया।

शराब से बिगड़ रहे थे परिवार, अब गांव को नशामुक्त बनाने का संकल्प

ग्राम पंचायत के सरपंच मनिजर राम और ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से शराबखोरी के कारण कई परिवार प्रभावित हो रहे थे। नशे की हालत में होने वाले विवाद और घरेलू झगड़ों से परिवारों का माहौल खराब हो रहा था। कई परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच रहे थे। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए ग्रामीणों और पंचायत ने गांव को पूरी तरह नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया है।

पंचायत का कहना है कि नशे के खिलाफ यह अभियान केवल जुर्माना लगाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि ग्रामीणों को लगातार समझाइश देकर जागरूक भी किया जाएगा। अभियान में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को इसकी सबसे बड़ी ताकत माना जा रहा है।

क्या दूसरे गांवों के लिए बनेगा मॉडल?

केवरी पंचायत की इस पहल ने नशे के खिलाफ सामुदायिक प्रयास की नई मिसाल पेश की है। अब देखने वाली बात होगी कि 1 सितंबर से लागू होने वाला यह निर्णय गांव में शराबखोरी पर कितना प्रभाव डालता है। यदि पंचायत की यह मुहिम सफल होती है तो यह आसपास की अन्य ग्राम पंचायतों के लिए भी नशामुक्ति अभियान की दिशा में प्रेरणास्रोत बन सकती है।

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