रायपुर. प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत उत्कृष्ट कार्यों और शून्य लंबितता सुनिश्चित करने की दिशा में किए गए उल्लेखनीय प्रयासों के लिए छत्तीसगढ़ को ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य’ घोषित किया गया है. अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी.
अधिकारियों ने बताया कि यह सम्मान बुधवार को भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) सम्मेलन के दौरान एनएचए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) सुनील कुमार बर्नवाल ने राज्य नोडल एजेंसी की मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. प्रियंका शुक्ला और परियोजना निदेशक (परिचालन) धर्मेंद्र गहवाई को प्रदान किया. उन्होंने बताया कि यह उपलब्धि राज्य नोडल एजेंसी द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में पारर्दिशता, दक्षता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए की गई निरंतर पहल का परिणाम है.
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हाल में आयोजित हुई ‘कलेक्टर्स कॉन्फ्रेंस’ में पहली बार आयुष्मान भारत योजना को एक एजेंडे के रूप में शामिल किया गया था. मुख्यमंत्री ने सभी जिलाधिकारियों को जिलों में योजना की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं.
उन्होंने बताया कि राज्य नोडल एजेंसी द्वारा हाल के महीनों में कई सशक्त कदम उठाए गए, जिनमें संदिग्ध दावों की पहचान कर व्यापक ऑडिट करना, सभी हितधारकों का उन्मुखीकरण और संवेदनशीलता प्रशिक्षण, ‘स्टेट एंटी फ्रॉड यूनिट’ टीम का गठन, और स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं के साथ नियमित संवाद एवं समन्वय तंत्र की स्थापना शामिल हैं. अधिकारियों ने बताया कि जनवरी 2025 में एनएचए की समीक्षा बैठक में छत्तीसगढ़ में संदिग्ध दावों की संख्या अपेक्षाकृत अधिक पाई गई थी. इस स्थिति में सुधार के लिए राज्य नोडल एजेंसी ने त्वरित कार्य योजना तैयार की.
उन्होंने बताया, ”स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जनवरी-फरवरी 2025 के बीच राज्यभर में 52 अस्पतालों का औचक निरीक्षण किया. योजना के मानकों का पालन न करने पर 45 अस्पतालों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की गई, जो अब तक की सर्वाधिक कार्रवाई रही.” अधिकारियों ने बताया कि इसके अलावा, 32 हजार से अधिक मामलों में मौके पर जाकर सत्यापन किया गया, जिससे फर्जी दावों की रोकथाम और दावे निपटान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाया गया.
उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग के इन प्रयासों के परिणामस्वरूप संदिग्ध दावों की संख्या में भारी गिरावट आई है. उन्होंने दावा किया, ”जहां पहले प्रति सप्ताह दो हजार से अधिक संदिग्ध दावे दर्ज होते थे, वहीं अब यह घटकर 500 से भी कम रह गए हैं. साथ ही दावा मंजूरी का समय घटकर अब केवल सात से दस दिन रह गया है.” अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत पंजीकृत 97 प्रतिशत अस्पताल सक्रिय हैं, जो योजना में अस्पतालों के विश्वास का प्रमाण है, जबकि पड़ोसी मध्यप्रदेश में यह दर मात्र 62 प्रतिशत और देश का औसत मात्र 52 प्रतिशत है.
इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि उनकी सरकार राज्य के प्रत्येक पात्र परिवार को गुणवत्तापूर्ण, नि?शुल्क और बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है.
साय ने कहा, ”यह अत्यंत हर्ष और गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत प्रदेश को ‘सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य’ घोषित किया गया है. यह सम्मान हमारी सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं में पारर्दिशता, दक्षता और जवाबदेही को सुदृढ़ करने के लिए किए गए प्रयासों का परिणाम है.”
