राष्ट्रवाणी (बस्तर ब्यूरो): प्रतिनिधि, धमतरी। छत्तीसगढ़ की प्राकृतिक जैव विविधता, अनूठी आदिवासी संस्कृति और सदियों पुरानी पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां अब केवल देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों के लिए शोध का विषय बन गई हैं। प्रदेश के घने वनांचल क्षेत्रों में पीढ़ियों से संरक्षित औषधीय वनस्पतियों और पारंपरिक उपचार तौर-तरीकों को बेहद करीब से समझने के लिए हाल ही में अमेरिका से दो विशेष अतिथि छत्तीसगढ़ पहुंचे।
आगोरा इकोटूरिज्म के तत्वावधान में आयोजित इस विशेष ज्ञान-आधारित यात्रा के दौरान विदेशी अतिथियों ने बस्तर, धमतरी और कबीरधाम जिलों के विभिन्न आदिवासी समुदायों के बीच समय बिताया और उनके पुश्तैनी उपचार ज्ञान की गहराइयों को समझा। आगोरा इकोटूरिज्म के संस्थापक डॉ. आलोक कुमार साहू के नेतृत्व में विदेशी अतिथियों ने बस्तर के धुरवा समुदाय, धमतरी जिले के दुगली क्षेत्र के पारंपरिक वैद्यों तथा कबीरधाम जिले के बैगा समुदाय की अनूठी उपचार परंपराओं का प्रत्यक्ष अवलोकन किया।
दुगली के वनांचल क्षेत्र स्थित बूटीगढ़ में आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ. आशीष कुमार साहू एवं डॉ. खिलेश्वर कुमार साहू ने स्थानीय पारंपरिक वैद्यों से विदेशी अतिथियों का परिचय कराया। इस दौरान वनों में मिलने वाली दुर्लभ औषधीय पौधों की पहचान, उनके सटीक पारंपरिक उपयोग, स्थानीय उपचार के तरीकों तथा पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक रूप से हस्तांतरित होने वाले वन औषधि ज्ञान पर बेहद विस्तृत और वैचारिक चर्चा संपन्न हुई।
विशेषज्ञों ने चर्चा के दौरान इस बात पर जोर दिया कि छत्तीसगढ़ को आधिकारिक रूप से ‘हर्बल स्टेट’ का दर्जा प्राप्त है और दुगली जैसे संबल वनांचल क्षेत्रों में सदियों से अनेक ऐसी जीवनरक्षक औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं जिनका उपयोग स्थानीय वैद्य आज भी अचूक उपचार के लिए करते आ रहे हैं। विदेशी अतिथियों ने आदिवासी समुदायों के पास प्रकृति के साथ तालमेल बिठाकर जीने के इस बहुमूल्य पारंपरिक ज्ञान की सराहना की।

