महिला जनप्रतिनिधि अब परिजनों को नहीं बना सकेंगी प्रतिनिधि
राष्ट्रवाणी, 11 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के स्थान पर उनके पति या अन्य परिजनों के प्रतिनिधि के रूप में काम करने की व्यवस्था पर अब रोक लगा दी गई है। राज्य शासन के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने छत्तीसगढ़ नगरपालिका नियम, 2022 में संशोधन कर इसकी अधिसूचना जारी कर दी है। राजपत्र में प्रकाशन के साथ ही नया प्रावधान प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में प्रभावी हो गया है।
पति-पुत्र समेत अन्य परिजन नहीं बन सकेंगे प्रतिनिधि
नए प्रावधान के तहत किसी भी नगरीय निकाय की निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि अपने पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन या अन्य नातेदार को अपने परोक्ष प्रतिनिधि, समन्वयक या संयोजक के रूप में नाम-निर्दिष्ट अथवा नियुक्त नहीं कर सकेंगी।
यह व्यवस्था विशेष रूप से महिला पार्षदों और महापौर समेत अन्य निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों पर लागू होगी। शासन के इस फैसले से उन मामलों पर रोक लगेगी, जहां निर्वाचित महिला प्रतिनिधि के स्थान पर उनके पारिवारिक सदस्य निकाय की बैठकों, अधिकारियों से समन्वय अथवा अन्य सार्वजनिक कार्यों में प्रतिनिधि के तौर पर सक्रिय रहते थे।
महिला प्रतिनिधियों की भूमिका और जवाबदेही होगी स्पष्ट
संशोधन का उद्देश्य निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की प्रत्यक्ष भूमिका और जवाबदेही सुनिश्चित करना माना जा रहा है। अब संबंधित पद से जुड़े अधिकारों और जिम्मेदारियों का निर्वहन स्वयं निर्वाचित प्रतिनिधि को ही करना होगा।
राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना के बाद नगरीय निकायों में इस व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट हो गई है। नगर पालिका, नगर पंचायत और अन्य नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों को उनके प्रतिनिधि या समन्वयक के तौर पर नामित करने की अनुमति नहीं होगी।
राजपत्र में अधिसूचना के प्रकाशन के साथ ही यह संशोधित व्यवस्था पूरे छत्तीसगढ़ में लागू हो गई है।

