राष्ट्रवाणी: उन्होंने कहा, “सर्वोच्च न्यायालय ने हमेशा उच्च न्यायालयों की संस्थागत स्वायत्तता का सम्मान किया है, जिसमें उनके अपने रोस्टर (कार्य-सूची) को विनियमित करने का अधिकार भी शामिल है. यह रुख इन संस्थाओं के संवैधानिक दर्जे के प्रति सम्मान पर आधारित है. फिर भी, इस तरह के अनुरोधों की बढ़ती संख्या हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी प्रक्रियाओं की कार्यकुशलता (responsiveness) को बेहतर बनाने की गुंजाइश है. हमें खुद से पूछना चाहिए: क्या तत्काल मामलों की पहचान और अधिक प्रभावी ढंग से की जा सकती है?
क्या मामलों की लिस्टिंग की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और पूर्वानुमान योग्य (predictable) बनाया जा सकता है? क्या तकनीक उन मामलों को प्राथमिकता देने में मदद कर सकती है, जहां देरी होने से ऐसा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई न की जा सके?…” CJI ने आगे कहा, “ये सवाल किसी संस्था की आलोचना करने के लिए नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक ज़िम्मेदारी से जुड़े हैं.” QR स्कैन करें, डाउनलोड करें News18 ऐप या वेबसाइट पर जारी रखने के लिए यहां क्लिक करें

