Crude Oil: रूसी तेल पर अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद भारतीय तेल कंपनियों का मार्जिन मजबूत रहेगा। फिच रेटिंग्स की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) के संदर्भ में मार्जिन उस लाभ को कहते हैं, जो कंपनी कच्चा तेल खरीदकर उसे पेट्रोल, डीजल, एटीएफ आदि उत्पादों के रूप में बेचने के बाद कमाती है। बता दें कि अमेरिका ने रूस के दो सबसे बड़े कच्चे तेल उत्पादकों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिंबध लगा दिया है।

कंपनियों पर कैसे पड़ेगा असर?
रेटिंग एजेंसी ने कहा कि प्रतिबंधों के साथ-साथ रूसी कच्चे तेल से बने परिष्कृत आयात पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध से भारतीय तेल विपणन कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन या क्रेडिट प्रोफाइल पर कोई खास असर पड़ने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, कंपनियों पर प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रतिबंध कितने समय तक लागू रहेंगे और उन्हें कितनी सख्ती से लागू किया जाएगा।

रूस भारत के लिए कच्चे तेल का प्रमुख स्रोत रहा है
रूस भारत के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख स्रोत रहा है। जनवरी-अगस्त 2025 के दौरान भारत के कच्चे तेल के आयात में रूसी कच्चे तेल का योगदान लगभग 33 प्रतिशत था। इन आपूर्तियों पर छूट ने भारतीय तेल विपणन कंपनियों के EBITDA और लाभप्रदता को सहारा दिया है।

रूसी तेल से जुड़े उत्पादों की मांग हो सकती है कम
फिच ने यह भी माना कि प्रतिबंधों से प्रभावित रूसी कच्चे तेल से जुड़े उत्पादों की वैश्विक मांग कम हो सकती है। इससे परिष्कृत उत्पादों की कीमतों में व्यापक अंतर आ सकता है। इससे रिफाइनरियों की लाभप्रदता पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है क्योंकि वे रियायती रूसी कच्चे तेल का सेवन कम कर देंगे, महंगे विकल्पों की ओर रुख करेंगे, और अस्थिर शिपिंग और बीमा लागतों का सामना करेंगे। साथ ही जो रिफाइनरियां बिना अनुमति वाले रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण जारी रखती हैं, उन्हें इन आपूर्तियों पर और भी अधिक छूट का लाभ मिल सकता है।

अतिरिक्त उपलब्धता के कारण तेल की कमतें बढ़ने की उम्मीद
इसमें कहा गया है कि वैश्विक बाजार में तेल की अतिरिक्त उपलब्धता के कारण कच्चे तेल की कीमतें ज्यादा बढ़ने की संभावना कम है। रिपोर्ट के मुताबिक 2026 में ब्रेंट क्रूड करीब 65 डॉलर प्रति बैरल रह सकता है, जो 2025 के अनुमानित 70 डॉलर से कम है। इससे भारतीय सरकारी तेल कंपनियों खर्च भी नियंत्रण में रह सकते हैं।

यूरोप को तेल निर्यात में आ सकती हैं मुश्किले
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि यूरोप को ज्यादा निर्यात करने वाली निजी रिफाइनर कंपनियों को नियमों का पालन करने में मुश्किलें आ सकती हैं, क्योंकि मिश्रित तेल में असली स्रोत पता करना कठिन हो जाता है। ऐसी कंपनियां अपने निर्यात बाजार बदल सकती हैं, कच्चे तेल का मिश्रण बदल सकती हैं या अनुपालन सिस्टम मजबूत कर सकती हैं।

भारतीय ओएमसी का मुनाफा अनुमान के अनुरूप रहा
भारतीय ओएमसी का वित्त वर्ष 2026 की पहली छमाही में मुनाफा अनुमान के अनुरूप रहा। सस्ते क्रूड और गैस ऑयल के अच्छे दामों का फायदा मिला, जिससे रिफाइनिंग मार्जिन छह से सात डॉलर प्रति बैरल तक रहा, जो पिछले साल की तुलना में थोड़ा बेहतर है। भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में IOC, HPCL और BPCL के लिए सब्सिडी वाले LPG की बिक्री पर उनकी अंडर-रिकवरी की भरपाई के लिए 300 अरब रुपये के सहायता पैकेज को भी मंजूरी दी है।

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