कोलकाता. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने फिल्म ‘द बंगाल फाइल्स’ की रिलीज पर रोक लगाने के अनुरोध वाली गोपाल चंद्र मुखर्जी के पोते की एक याचिका सोमवार को खारिज कर दी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि फिल्म में नायक को गलत तरीके से चित्रित किया गया है. न्यायमूर्ति अमृता सिन्हा ने याचिका को विचार योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया. फिल्म अगस्त 1946 में कोलकाता में हुए सांप्रदायिक दंगों पर आधारित है. इन दंगों को ‘ग्रेट कलकत्ता किलिंग्स’ के नाम से जाना जाता है.

याचिकाकर्ता के वकील ने अदालत से कहा कि गोपाल चंद्र मुखर्जी के पोते शांतनु मुखर्जी ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के समक्ष एक आरटीआई आवेदन दायर किया था, जिसमें फिल्म में उनके दादा के चित्रण का आकलन करने में बोर्ड की भूमिका पर सवाल उठाया गया था. उन्होंने दलील दी कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बावजूद, मांगी गई जानकारी प्रदान नहीं की गई.

सीबीएफसी के वकील ने कहा कि सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन का कोई जवाब नहीं मिलने के बाद याचिकाकर्ता ने निर्धारित समय में फिल्म की रिलीज के खिलाफ कोई अपील दायर नहीं की. प्रतिवादियों में से एक के वकील ने कहा कि चूंकि फिल्म पहले ही पूरे देश में दिखाई जा चुकी है, इसलिए याचिका का कोई अर्थ नहीं रह गया है. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद, न्यायमूर्ति सिन्हा ने कहा कि याचिकाकर्ता को सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत निर्धारित सुविधा का लाभ उठाना चाहिए. उन्होंने रिट याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया.

शांतनु मुखर्जी ने अपनी याचिका में दावा किया कि उनके दादा एक स्वतंत्रता सेनानी थे और 1940 के दशक में बोबाजार में उनकी बकरे के मांस की दुकान थी. शांतनु के अनुसार, उन्हें फिल्म में गलत तरीके से चित्रित किया गया है. उन्होंने एक तस्वीर पेश करते हुए आरोप लगाया कि फिल्म में गोपाल चंद्र मुखर्जी को अपमानजनक रूप से “पथा” (बकरी के लिए एक बांग्ला शब्द) कहा गया है. उन्होंने कहा कि फिल्म में उनके दादा को 16 अगस्त, 1946 की घटनाओं में शामिल दिखाकर गलत तरीके से चित्रित किया गया है.

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