बरेली:दिशा पाटनी के घर फायरिंग कर दहशत फैलाने वाले शूटरों में रविंद्र काफी दिलेर और हेकड़ था। उसने कैमरों से बचने के लिए रास्ते बदलने और मोबाइल के कम इस्तेमाल का तो ध्यान रखा, लेकिन कहीं भी चेहरा नहीं छुपाया, वहीं अरुण को पहचानने का संकट होटल की सीसीटीबी फुटेज ने पूरा कर दिया।

हरियाणा का शूटर रविंद्र पहले भी कई वारदातें कर चुका है। बरेली पुलिस ने जब उसे ट्रेस करना शुरू किया तो हर जगह उसका चेहरा खुला मिला। ऐसा लगा ही नहीं कि वह घटना करके आया हुआ शूटर है। झुमका चौराहे के पास बाइक से दबंगई से उतरते रविंद्र ने चाय पीने में करीब 22 मिनट बिताए। हालांकि दुकानदार को नकद ही भुगतान किया, ताकि ऑनलाइन लेनदेन से वह ट्रेस न हो जाएं।

वहीं अरुण ने कहीं भी हेलमेट नहीं उतारा। इसलिए उसे ट्रेस करना काफी मुश्किल रहा। एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि रामपुर के होटल की फुटेज में अरुण का चेहरा साफ हो सका। जब भोजीपुरा के बाद बदमाशों की फुटेज नहीं मिल पा रही थी तो शाही के पास एक सीसी कैमरे की फुटेज में रविंद्र के लाल रंग के पूमा लिखे जूते दिखे और आगे की राह मिल गई।

रामपुर के अपना पंजाब होटल में किया आराम

11 सितंबर को ही शूटरों की पहली टीम का प्रयास विफल होने के बाद दोनों टीम सीबीगंज के आसपास मिलीं। फिर रास्ते बदलते हुए ये मिलक पहुंचे और सीधे दिल्ली हाईवे पर निकल लिए। बदमाशों ने इतनी तेज बाइक दौड़ाई की टोल प्लाजा के कैमरों में भी उनका चेहरा नहीं आया। ये सुबह 11 बजे रामपुर के अपना पंजाब होटल में रुके।

वहां नकुल व विजय की टीम ने रविंद्र व अरुण को अपना इनपुट दिया। यहां तय हुआ कि नकुल की टीम का अब कोई काम नहीं है, इसलिए वह दोनों निकल गए। रविंद्र व अरुण ने इसी होटल में खाना खाया और आराम किया। यहां से 12 की रात वह निकले और उसी रात 12 बजे फतेहगंज पश्चिमी टोल प्लाजा पर उनकी सफेद अपाचे बाइक ट्रेस हुई जो रात 2.32 बजे झुमका चौराहे पर आ गई। रात के अंतिम पहर इन्होंने पाटनी के घर फायरिंग कर दी।

जसौली में चिपकाया नंबर पर टेप

बदमाशों की बाइक की नंबर प्लेट पर पुलिस को पेंट किया दिख रहा था। इसलिए शुरू में ट्रेस करने में दिक्कत हुई। तब पुलिस को किला क्षेत्र के जसौली की एक फुटेज मिली। इसमें एक शूटर अपाचे बाइक की नंबर प्लेट पर टेप चिपकाता मिल गया। इससे पहले की फुटेज देखने पर बाइक का नंबर मिल गया।

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