राष्ट्रवाणी: Improved Varieties of Oats: नागौर जिले में रबी सीजन की शुरुआत के साथ पशुपालकों ने हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के लिए जई की बुवाई शुरू कर दी है. जई को पशुओं के लिए पौष्टिक और स्वादिष्ट हरा चारा माना जाता है. इसकी खेती से पशुपालक चारे की व्यवस्था बेहतर करने के साथ बाजार से खरीदे जाने वाले पशु आहार पर खर्च भी कम कर सकते हैं. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार नवंबर का शुरुआती समय जई की बुवाई के लिए उपयुक्त है. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट रामनिवास चौधरी ने ओएस-6, ओएस-7 और कैंट जैसी उन्नत किस्मों के प्रमाणित बीज चुनने की सलाह दी है. प्रति हेक्टेयर 75 से 100 किलो बीज की जरूरत होती है. समय पर बुवाई, उचित सिंचाई और खरपतवार नियंत्रण से हरे चारे का उत्पादन बढ़ाया जा सकता है.
Trending
- घोड़ा मधुमक्खी का हमला कितना खतरनाक, जानिए बचने के तरीके, इस बड़े खुलासे से मचा हड़कंप – राष्ट्रवाणी
- चूहे को जिंदा जलाया तो पुलिस ने 4 युवकों को भेजा जेल, सामने आई दर्दनाक वीडियो, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान – राष्ट्रवाणी
- ‘क्या जनता इस बार दीपावली मनाना ही छोड़ दे?’ CNG और LPG के दाम बढ़ने पर बिफरी शिवसेना UBT – राष्ट्रवाणी
- मम्मी की पुरानी सिल्क साड़ी से बनवाएं खूबसूरत को-ऑर्ड सेट, देखें डिजाइन्स – राष्ट्रवाणी
- कमाल का है इस बिहारी शख्स का दिमाग, बकरी पालन से कमा रहा लाखों, ऐसे की थी शुरुआत – राष्ट्रवाणी
- कांग्रेस को दिल्ली में सरकार का मौका मिले, तो 24 घंटे में दूर हो जाएगा प्रदूषण: उदित राज – राष्ट्रवाणी
- 23 साल की उम्र में सरपंच बने सौरभ मीणा, राजस्थान की टॉप पंचायत बनाने का लक्ष्य – राष्ट्रवाणी
- बदलते मौसम में पशुओं पर लंगड़ा बुखार का खतरा, समय रहते पहचान और बचाव जरूरी – राष्ट्रवाणी

