राष्ट्रवाणी: प्रतिनिधि, अंबिकापुर : उत्पाद शुल्क अधिनियम के तहत छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति परिवारों को घरेलू उपयोग और सामाजिक-धार्मिक उत्सवों के लिए अधिकतम पांच लीटर देशी महुआ शराब निर्माण और अपने पास रखने की छूट है, लेकिन सरगुजा जिले के लखनपुर जनपद के ग्राम पंचायत केवरी ने यह अधिकार छोड़ दिया है।
शराब सेवन से सामाजिक और आर्थिक पतन के साथ मारपीट से तंग गांव की महिलाओं की पहल से ग्राम पंचायत ने एक सितंबर से पूर्ण शराबबंदी लागू कर दिया है। इसके तहत शराब निर्माण,बिक्री के साथ शराब सेवन पर अर्थदंड का प्रविधान लागू किया गया है। ग्राम पंचायत केवरी की आबादी लगभग 2500 है।
यहां मतदाताओं की संख्या लगभग 1100 है। यहां गोंड, कंवर जनजाति के अलावा मानिकपुरी, यादव, लोहार समाज के लोग निवास करते हैं। शराबबंदी से पहले कई घरों में देशी महुआ शराब का निर्माण होता था लेकिन अब यह बंद हो चुका है।
ऐसे परिवार जो शराब निर्माण और बिक्री करते थे ,वे भी अब यह धंधा बंद कर चुके हैं। शराबबंदी का निर्णय सामूहिक रूप से लिया गया। ग्रामसभा में सभी की सहमति से अर्थदंड का प्रविधान लागू किया गया है।
अर्थदंड की राशि का उपयोग गांव के विकास में किया जाएगा। ग्रामीणों की सहमति से ही हर काम होगा। हर मोहल्ले में निगरानी समिति बनी है जो शराबबंदी के निर्णय का पालन कराने के लिए हर गतिविधि पर नजर रखती है।
मनिजर राम, सरपंच, ग्राम पंचायत केवरा स्वप्रेरणा से लिया गया यह निर्णय सराहनीय है क्योंकि नशा नाश का कारण हैं। ज्यादातर देखा जाता है कि पांच लीटर महुआ शराब की छूट को कई परिवार व्यवसाय बना लेते हैं। यदि इसे छोड़कर शिक्षा से जुड़कर आगे बढ़ने का प्रयास हो तो जीवन स्तर एकदम से बदल जाएगा।
शराब निर्माण की छूट के बदले आरक्षण के दूसरे लाभ लेने का प्रयास करना चाहिए। रंजीत गुप्ता, सहायक जिला आबकारी अधिकारी सरगुजा
